नारी शक्ति वंदन अधिनियम: कांग्रेस का अवरोधक रुख और नकारात्मक राजनीति
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में जब-जब महिलाओं को सशक्त करने के निर्णायक कदम उठाए गए, तब-तब कांग्रेस ने 'समर्थन' के नाम पर 'अड़ंगा' डालने की राजनीति की है। अप्रैल 2026 में लोकसभा में जो हुआ, वह कांग्रेस की इसी नकारात्मक मानसिकता का एक नया अध्याय है।
1. संसद में 'अवरोध' की राजनीति
कांग्रेस ने वर्षों तक महिला आरक्षण बिल को ठंडे बस्ते में लटकाए रखा। जब प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने इसे वास्तविकता में बदलने का संकल्प लिया, तो कांग्रेस ने सदन में इसके विरुद्ध मतदान करके अपनी असली मंशा साफ कर दी। बिल का विरोध करना यह दर्शाता है कि कांग्रेस महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने के बजाय केवल राजनीति करने में रुचि रखती है।
2. 'श्रेय' न मिलने की हताशा
कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे इस ऐतिहासिक कार्य का श्रेय खुद लेना चाहते थे। 2023 से लेकर 2026 तक, कांग्रेस ने हर बार नए-नए बहाने (जैसे ओबीसी कोटा या परिसीमन का मुद्दा) बनाकर इस पवित्र कार्य में बाधा डाली। जब वे खुद सत्ता में थे, तब उन्होंने इसे कभी गंभीरता से लागू नहीं किया, और अब जब भाजपा इसे लागू कर रही है, तो वे ईर्ष्यावश इसका विरोध कर रहे हैं।
3. बहानेबाजी और भ्रम फैलाना
कांग्रेस ने परिसीमन (Delimitation) और जनगणना जैसे संवैधानिक अनिवार्यताओं को लेकर जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश की। 2026 में जब सरकार ने प्रक्रिया को गति देने के लिए संशोधन पेश किया, तो कांग्रेस ने उसे "क्षेत्रीय असंतुलन" का डर दिखाकर उत्तर और दक्षिण भारत के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की। यह देश की एकता को खतरे में डालने वाली नकारात्मक राजनीति है।
4. ओबीसी कार्ड: केवल वोट बैंक की चिंता
आरक्षण के भीतर आरक्षण (OBC कोटा) की मांग कांग्रेस की अचानक जागी 'पिछड़ा वर्ग' प्रेम को दर्शाती है। असल में, यह केवल बिल को अनिश्चितकाल के लिए लटकाने की एक सोची-समझी चाल थी। अगर कांग्रेस वास्तव में गंभीर होती, तो 2010 में जब उनकी सरकार ने राज्यसभा से बिल पास कराया था, तब उन्होंने ओबीसी कोटे को शामिल क्यों नहीं किया? यह उनकी कथनी और करनी के बीच का अंतर उजागर करता है।
5. महिला विरोधी छवि और चुनावी डर
अप्रैल 2026 में बिल गिरने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस को डर है कि यदि महिलाओं को आरक्षण मिल गया, तो उनका पारंपरिक वोट बैंक और परिवारवादी राजनीति खत्म हो जाएगी। उन्होंने राष्ट्रहित से ऊपर अपनी पार्टी के हितों को रखा और 33% महिलाओं के हक पर प्रहार किया।