महिला आरक्षण पर सियासत तेज: भाजपा ने विपक्ष पर साधा निशाना, परिसीमन को बताया जरूरी
संसद में संविधान संशोधन विधेयक पारित न हो पाने को लेकर शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। भाजपा ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए परिसीमन (Delimitation) अनिवार्य है।
पार्टी के मुख्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ नेता रवि शंकर प्रसाद और स्मृति ईरानी ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि यदि वर्तमान 543 सीटों के भीतर ही आरक्षण लागू किया जाता है, तो दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
रवि शंकर प्रसाद ने कांग्रेस और प्रियंका गांधी वाड्रा के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं को किसी भी रूप में “वस्तु” के तौर पर प्रस्तुत करना अस्वीकार्य है और इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय महिलाएं सम्मान और अधिकार की पात्र हैं, न कि राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा।
महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस की मांग को खारिज करते हुए प्रसाद ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 81(2) के तहत लोकसभा सीटों का आवंटन जनसंख्या के आधार पर होता है, और इसके लिए परिसीमन आवश्यक है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती है, जिससे 33% महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
भाजपा ने जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया को इस दिशा में जरूरी कदम बताया, जबकि कांग्रेस 543 सीटों के भीतर ही आरक्षण लागू करने की पक्षधर है। प्रसाद ने आरोप लगाया कि DMK जैसे दल महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों में बाधा डाल रहे हैं और इस मुद्दे पर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है।
वहीं, स्मृति ईरानी ने कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि महिलाओं के समान अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे को गंभीरता से लेने के बजाय उसका मजाक उड़ा रही है।
ईरानी ने यह भी कहा कि कांग्रेस के लंबे शासनकाल में करोड़ों महिलाएं बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहीं, जबकि भाजपा सरकार ने महिलाओं को बैंकिंग और अन्य योजनाओं से जोड़ने का काम किया। उन्होंने एनडीए सरकार द्वारा लागू जेंडर बजट को महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
भाजपा के अनुसार, महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख दोहरे मानदंडों को दर्शाता है, जो न केवल संवैधानिक व्यवस्था बल्कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति भी उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़ा करता है।