INTACH Lucknow chapter ने धूमधाम से मनाया विश्व धरोहर दिवस
INTACH ने धूमधाम से मनाया विश्व धरोहर दिवस
18 अप्रैल, 2026 | लखनऊ. इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक), लखनऊ चैप्टर ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज, बीके टी स्कूल, जगृति लोरेटो स्कूल, मॉडर्न एकेडमी और खुंखुंजी गर्ल्स पीजी कॉलेज के साथ मिलकर एक जीवंत विश्व धरोहर दिवस कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें विरासत वॉक और शैक्षणिक संगोष्ठी के द्वाराअवध की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विरासत विशेषज्ञ श्री ए. के. श्रीवास्तव द्वारा जगृति लोरेटो स्कूल के छात्रों के लिए हज़रतगंज में आयोजित विरासत वॉक से हुई। वॉक सिब्तैनाबाद इमामबाड़ा से शुरू होकर कोठी नूर बख़्श, तारावली कोठी (रॉयल ऑब्ज़र्वेटरी), कंकर वाली कोठी और दिल्ली एंड लंदन बैंक सहित ‘गंज’ की ऐतिहासिक विरासत को जोड़ते हुए उत्तरी रेलवे के डीआरएम कार्यालय और वर्ष 1857 की प्रमुख प्रतिरोध स्थलों तक पहुँची, जिससे छात्रों के लिए शहर के शहरी और सैन्य इतिहास की एक स्पष्ट समझ बनी।
दूसरा विरासत भ्रमण कार्यक्रम भारतीय पुरातत्व संरक्षण, लखनऊ सर्कल के सहयोग से लखनऊ रेज़ीडेंसी में आयोजित की गई, जहाँ भागीदारों ने स्थल की वास्तुकला के विलय, साहस और संघर्ष के इतिहास का अवलोकन किया, जिसने 19वीं शताब्दी के लखनऊ को आकार दिया।
अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज के साथ मिलकर “अवध की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत: लोक परंपराएँ, रंगमंच, साहित्य और गीत” शीर्षक संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी के दो विचारोत्तेजक विशेषज्ञ चर्चाओं में पहला “अवध का लोक रंगमंच” था, जिसमें प्रमुख रंगकर्मी श्री सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ, श्री गोपाल सिन्हा, श्री ललित पोखरिया और श्री प्रफुल्ल त्रिपाठी ने पारंपरिक और आधुनिक नाट्य प्रणालियों, सहित क्षेत्रीय लोक रूपों, के अपने दीर्घकालिक अनुभव साझा किए। उन्होंने अवध के नाट्य परंपराओं की ऐतिहासिक समृद्धि पर प्रकाश डालते हुए दस्तावेज़ीकरण, पुनरुद्धार और संस्थागत समर्थन के लिए आह्वान किया।
दूसरी विशेषज्ञ चर्चा, “अवध की लोक परंपराएँ: परंपरा और पहचान” शीर्षक से आयोजित हुआ, जिसमें पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु सिंह, अवधी लोक साहित्य की प्रमुख विद्वान, और सुश्री विनीता मिश्रा, एक जानेमाने कवयित्री और सांस्कृतिक कार्यकर्ता शामिल हुईं। पैनलिस्टों ने अवधी संस्कृति, भाषा और मौखिक परंपराओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए अवधी भाषा और मौखिक परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम का एक विशेष अंश मिरासिन समुदाय पर केंद्रित था, जो लग्न, जन्म और अन्य शुभ अवसरों पर लोक गीत गाकर परंपरा को जीवित रखने वाली महिला कलाकारों का पारंपरिक समूह है। “मिरासिन” शब्द “मिरास” (विरासत) से व्युत्पन्न है, जो उनकी अमूर्त विरासत के संरक्षक के रूप में भूमिका को रेखांकित करता है। अनुभवी मिरासिन — इमराना, रफ़िया ख़ातून, रुबीना और फ़ारज़ाना जी — की लोक गीतों का जीवंत प्रस्तुति ने अवध की जीवंत विरासत का एक भावपूर्ण उत्सव प्रस्तुत किया।
यह कार्यक्रम इंटैक लखनऊ चैप्टर की संयोजक डॉ. नीतू अग्रवाल द्वारा प्रस्तावित और आयोजित किया गया, जिसमें श्री एन. के. एस. चौहान, श्रीमती कनक रेखा चौहान, डॉ. सुमना वर्ष्णेय, श्री ए. के. श्रीवास्तव और प्रो. निशि पांडेय व डॉ पारुल सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा।