घरेलू सहायिकाओं के उत्थान हेतु "घरेलू कामगार समिति" का हुआ गठन, 8 घंटे काम के लिए 17 हजार वेतन की मांग
गाजियाबाद। मुख्यालय राष्ट्रिय सैनिक संस्था , 133 बी मॉडल टाउन ईस्ट, गाज़ियाबाद “ घरेलू कामगार समिति “की एक बैठक आयोजित की गई। “ घरेलू कामगार समिति “ का पंजीकरण राष्ट्रिय सैनिक संस्था ने कराया है। “ घरेलू कामगार समिति “ में घरो में काम करने वाली वो महिलाए है जो उन घरेलू साहिकाओ के लिए आवाज उठाएगी जिनसे काम ज्यादा लिया जाता है और पैसे कम दिए जाते है।
“ घरेलू कामगार समिति “ ( पंजीकृत ) की अध्यक्षा सुश्री मोनिका कश्यप ने बताया की जो लोग सक्षम है वो ही सहायक रखते है। सक्षम होना इस बात का द्योतक है की उन्होंने कुछ निवेश भी किये होंगे जो समय के साथ बढ़ते है परन्तु घरेलू सहायिका का ना तो कोई निवेश है और ना ही उस अनुपात में उनकी वेतन वृद्धि होती है जिस अनुपात में मालिक प्रगति करते हैं।
सुश्री मोनिका कश्यप ने बताया की स्वामी विवेकानंद ने कहा था की जो व्यक्ति सक्षम होने के बाद उन गरीब लोगों का ख्याल नहीं रखता जिनके सामूहिक इनडायरेक्ट टेक्स से उसने शिक्षा अर्जित की है उसे देश भक्त नहीं कहा जा सकता। लोग नमक पर भी टेक्स देते है। टेक्स से वो सबसिडी मिलती है जिसके कारण उच्च शिक्षा प्राप्त की जाती है। इसलिए यह आवश्यक है की सक्षम हो जाने के बाद लोग अपने सहायकों का लीक से हटकर ध्यान रखे।
“ घरेलू कामगार समिति “ की सचिव श्रीमती आरती देवी ने कहा की 8 घंटे की ड्यूटी के लिए घरेलू साहियका को कम से कम 17 हजार रूपये प्रतिमाह मिलना चाहिए | कारण यह है की घरेलू साहियका एक कुशल श्रमिक है। उत्तर प्रदेश में विशेषकर गाज़ियाबाद में कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 16,868 /- है, (यानी 17 हजार) इसी आधार पर अगर कोई घरेलू साहियका दो घंटे के लिए पार्ट टाइम काम करती है तो उसका कम से कम वेतन 4 हजार होना चाहिए। जो लोग ऐसा नहीं कर रहे है वो अब इस बात का संज्ञान लेने की कृपा करें।
“ घरेलू कामगार समिति “ के मुख्य संरक्षक एवं राष्ट्रिय सैनिक संस्था के राष्ट्रिय अध्यक्ष कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने कहा की बेईमान मालिक को भी नौकर ईमानदार चाहिए। लोग स्वयंम अनाप शनाप पैसा कमाते है परन्तु अपने सहायकों या सहायिकाओं को वेतन देने में कंजूसी बरतते हैं | ऐसे लोगों पर सामाजिक दबाव बनाने के लिए “ घरेलू कामगार समिति “ का पंजीकरण करवाया गया है।
गौरव सेनानी ज्ञान सिंह , गणेश दत्त , सतेन्द्र सिंह और श्रीमती मोनिका गोयल ने कहा की समय बदल चूका है | आज तथाकथित गरीब नौकरानी के पास भी मोबाइल फोन है और वो टी वी भी देखती है | समाज के सबसे निचले असंगठित वर्ग में आते है घरेलू सहायक और सहायिकाएं।
राष्ट्रिय सैनिक संस्था ने प्रयत्न किया है की सहायकों या सहायिकाओं को संगठित किया जाये और उन्हें अपने शोषण के खिलाफ आवाज उठाने में समर्थ किया जाये।
श्रीमती चांदनी , मंजू , मंजू देवी , नीतू , गुडिया , आशा , आरती , पिंकी , शहनाज सहित सभी उपस्थित लोगों ने घरेलू साहियकाओ के न्यूनतम वेतन 17 हजार प्रतिमाह का जोर दार समर्थन किया |
मोनिक कश्यप
अध्यक्ष , घरेलू कामगार समिति
आरती देवी
सचिव , घरेलू कामगार समिति