देश की आधी आबादी की आवाज़ को अभी और इंतज़ार — रेखा शर्मा
नई दिल्ली। संसद का बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया, लेकिन इस बार सत्र की समाप्ति के साथ एक अहम मुद्दा अधूरा रह गया—महिलाओं के बढ़ते प्रतिनिधित्व की उम्मीद। महिला सांसद रेखा शर्मा ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह केवल एक विधेयक का रुकना नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी की आकांक्षाओं का ठहर जाना है।
उन्होंने कहा कि पूरे सत्र के दौरान संसद में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और सरकार ने विपक्ष के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश भी की। लोकतंत्र में सहमति और संवाद की परंपरा को निभाया गया, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम आगे नहीं बढ़ सका।
रेखा शर्मा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों का प्रतीक है। यह उन बेटियों, माताओं और युवतियों का सपना है, जो देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी चाहती हैं। पंचायतों और स्थानीय निकायों में नेतृत्व कर चुकी महिलाएं अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी भूमिका मजबूत करना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू होती, तो आने वाले वर्षों में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचती। इससे नीतियों में संवेदनशीलता, समावेशन और संतुलन बढ़ता, साथ ही देश की बेटियों को यह संदेश मिलता कि लोकतंत्र उन्हें केवल मतदाता नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली शक्ति के रूप में भी स्वीकार करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं—चाहे वह विज्ञान हो, सेना, शिक्षा, प्रशासन या खेल। ऐसे में राजनीति और नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ाना समय की मांग है।
रेखा शर्मा ने भावुक होते हुए कहा कि यह अवसर भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बन सकता था, लेकिन फिलहाल यह इंतज़ार में बदल गया है। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि यह प्रतीक्षा निराशा नहीं, बल्कि एक मजबूत संकल्प का संकेत है।
उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी केवल अधिकार नहीं मांग रही, बल्कि राष्ट्र निर्माण में समान भागीदारी चाहती है। आने वाले समय में यह आवाज़ और बुलंद होगी, और वह दिन जरूर आएगा जब महिलाओं की भागीदारी भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बनेगी।
यह केवल प्रतिनिधित्व का नहीं, बल्कि सम्मान, समान अवसर और देश के भविष्य का सवाल है।