स्मार्ट प्रीपेड मीटर बना जी का जंजाल,प्रदेश भर की जनता में आक्रोश।जेब पर डाल रहा डाका।
आपके घर का स्मार्ट मीटर अगर बिजली विभाग ने बदल दिया है, तो है तो है तो ये स्मार्ट मीटर लेकिन इसका पूरा कंट्रोल बिजली विभाग के हाथ में होता है।पब्लिक में मचे हाहाकार और बिजली घर में लगी लम्बी लम्बी लाइन देख कर लगता है स्मार्ट मीटर दरअसल स्मार्ट नही चोर है।
बदलती दुनिया के साथ एनालॉग उपकरण से स्मार्ट उपकरण की तरफ जाने का एक ही मकसद था पारदर्शिता यानी एक बटन दबाने से सब कुछ स्मार्ट उपकरण का डाटा यूजर्स के सामने आ जाए।
जैसे कि स्मार्ट मोबाइल फोन में कोई भी यूज़र अपने डेटा का सेकेंड प्रति सेकेंड खपत पता कर सकता है, यहां तक कि पिछले महीने के मिनट टू मिनट खर्च डेटा की इस महीने खर्च उसी मिनट टू मिनट डेटा से तुलना कर सकता है।आपके मोबाइल फोन में तमाम ऐप हैं, फेसबुक ट्विटर इंस्टाग्राम? आपने कितने MB डेटा किस ऐप को चलाने में खर्च किया, कब कितनी देर कौन सा ऐप चलाया सब पता चल जाता है।
स्मार्ट मीटर का मुख्य नियंत्रण बिजली वितरण कंपनी (Electricity Utility Company) के केंद्रीय सिस्टम (Central Head-End System - HES) से होता है।स्मार्ट मीटर को बिजली कंपनी अपने ऑफिस से रिमोटली (दूर बैठे) नियंत्रित कर सकती है। वे मीटर की रीडिंग ले सकते हैं, लोड कंट्रोल कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर मीटर को बंद या चालू भी कर सकते हैं।स्मार्ट मीटर का टेंडर पड़ा , 2018 में जब बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा थे और स्मार्ट मीटर सप्लाई का टेंडर चार कंपनियों को दिया गया Genus Power Infrastructures, Secure Meters Ltd, Larsen & Toubro और HPL Electric & Power....इनसे स्मार्ट मीटर और इलेक्ट्रॉनिक मीटर से भी मंहगे इंटरनेट कनेक्टेड स्मार्ट मीटर घरों में मुफ्त लगाया जाने लगा , इसबार इस स्मार्ट मीटर का नियंत्रण पूरी तरह बिजली विभाग के पास हो गया मगर सब कुछ स्मार्ट की तरह आप अपने फोन से कनेक्ट करके रियल टाइम डेटा नहीं देख सकते, अपने फोन को मीटर से कनेक्ट ही नहीं कर सकते,अब घर के बाहर लगे मीटर को कोई 24×7 हर वक्त तो देखेगा नहीं? तो सेंट्रल कमांड कंप्यूटर में एक क्लिक पर सारे स्मार्ट मीटर की रीडिंग जब चाहे बढ़ाने की फेसिलिटी बिजली विभाग को प्राप्त हो गयी है , यह स्मार्ट मीटर इंटरनेट के माध्यम से सीधे विभाग के सेंट्रल कमांड कंप्यूटर के नियंत्रण में रहते हैं।
आप ध्यान दीजिए कि आपके घर का सेंक्शन लोड 2 किलोवाट है, घर में बिजली से चलने वाले उपकरण भी वहीं हैं मगर एनोलोग मैकेनिकल मीटर , फिर इलेक्ट्रॉनिक मीटर के बाद स्मार्ट मीटर लगने के कारण बिजली के बिल चार गुना अधिक आने लगे हैं, कहीं कहीं इससे भी अधिक, जबकि बिजली विभाग ने चार या पांच गुना अधिक रेट नहीं बढ़ाएं हैं।
ध्यानयोग्य बात ये है कि 2010 में उत्तर प्रदेश बिजली विभाग के अधिकतम स्लैब 300+ यूनिट पर बिजली की दर ₹4.5 – ₹5.0 प्रति यूनिट थी और अब अर्थात 2026 में 300+ यूनिट पर ₹6.0 – ₹6.50 प्रति यूनिट मगर आपके हमारे घर की बिजली का बिल इतने दिनों में 4 गुना गुना अधिक हो गया,कहीं कहीं तो पहले 500 रुपये का बिल आने वाले घरों में अब 5000 रुपये तक का बिल आ रहा है। मीटर "तेज भागने" या बिल में अधिक यूनिट दिखाने की शिकायतें आम हैं। दरअसल इसके अतिरिक्त स्मार्ट मीटर आपके घर का रियल टाइम लोड चेक करता रहता है और सेंक्शन लोड से ज़रा भी अधिक लोड एक सेकेंड के लिए भी हुआ तो पेनाल्टी बिल में जुड़ कर आ जाती है।