पंजाब की मंडियों में पड़ी गेहूं की फसल सड़ने लगी, सरकारी खरीद में सुस्ती से किसानों में हाहाकार
रिपोर्ट: बलदेव
पंजाब — राज्यभर की मंडियों में इस वक्त किसानों की मेहनत धूल और बारिश के बीच सड़ती नजर आ रही है। सरकारी खरीद में आई भारी देरी और गुणवत्ता जांच की कठोर शर्तों के कारण लाखों टन गेहूं खुले में पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है। कई स्थानों पर गेहूं के बोरे फट चुके हैं और दानों में नमी बढ़ने से गुणवत्ता गिर रही है।
किसानों का कहना है कि सरकार ने खरीद शुरू तो की, लेकिन रफ्तार बेहद धीमी है। कई मंडियों में गेहूं का गुणवत्ता परीक्षण पास न होने के कारण एजेंसियां खरीद से मना कर रही हैं। “हमने दिन-रात मेहनत की है, अब सरकार कह रही है कि अनाज मानकों पर खरा नहीं उतरता। अगर बारिश हो गई तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी,” फरीदकोट जिले के किसान जसवंत सिंह ने कहा।
जानकारी के अनुसार, पंजाब में इस साल लगभग 125 लाख टन गेहूं की खरीद का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अब तक की सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक खरीद पिछले साल की तुलना में करीब 69% कम रही है business-standard.com।
कई मंडियों में अनाज के ढेर लगाने की जगह तक नहीं बची है, क्योंकि पुराने स्टॉक को उठाने में देरी हो रही है। krishipitaara.com की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के गोदाम पहले से भरे हुए हैं और तकरीबन 50 लाख टन गेहूं भंडारण की जगह के बिना पड़ा है।
बठिंडा, अमृतसर, तरनतारन और पटियाला जैसे जिलों से सूचना है कि किसान कई-कई दिन मंडियों में ठहरे हैं लेकिन उनकी फसल तौलने या खरीदने नहीं ली जा रही। गर्मी और नमी से गेहूं का रंग फीका पड़ने लगा है।
इस बीच, किसान संगठनों ने सरकार से गुणवत्ता मानकों में राहत और तत्काल खरीद तेज करने की मांग की है। यदि जल्द हल नहीं निकला, तो 17 अप्रैल को पूरे पंजाब में रेल–रोको आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
राज्य सरकार का कहना है कि एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) को पत्र भेजकर नियमों में कुछ नरमी की मांग की गई है और अतिरिक्त खरीद केंद्र सक्रिय किए जा रहे हैं। पर किसानों का धैर्य अब जवाब देने लगा है — क्योंकि उनके सामने सबसे बड़ा सवाल है, “अगर अनाज मंडियों में ही सड़ गया तो मेहनत का मोल कौन देगा?”
(संवाददाता: बलदेव, पंजाब)