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"लोगों की जिंदगी बदलूंगी" — कहा था IIT टॉपर RAS अधिकारी ने; पहली पोस्टिंग में ही 60,000 घूस लेते गिरफ्तार ACB ने SDM काजल मीणा समेत तीन को दबोचा,


विजय कुमार | वरिष्ठ पत्रकार

एक मॉक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया था — "IIT से इंजीनियर होकर सिविल सर्विस क्यों?" काजल मीणा का जवाब था:
"एक प्रशासनिक अधिकारी के पास लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने का अधिकार होता है।"

वह वीडियो आज सोशल मीडिया पर वायरल है। लेकिन इस बार प्रशंसा के लिए नहीं — व्यंग्य के लिए।

16 अप्रैल 2026 को राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो ने करौली जिले के नादौती उपखंड कार्यालय में SDM काजल मीणा, उनके रीडर दिनेश कुमार सैनी और वरिष्ठ सहायक प्रवीण धाकड़ को जमीन विवाद की फाइनल डिक्री जारी करने के बदले ₹60,000 की घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह उनकी पहली सक्रिय पोस्टिंग थी।

कौन हैं काजल मीणा?
काजल मीणा राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) 2024 बैच की अधिकारी हैं और अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में प्रथम रैंक प्राप्त की थी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित IIT मंडी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की है।

RAS बनने से पहले वे EPFO और दूरसंचार विभाग में सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO) के रूप में काम कर चुकी थीं। 2017 में JEN पद पर चयन हुआ था, लेकिन उन्होंने जॉइन नहीं किया।

नादौती में उनकी तैनाती करीब 6 महीने पहले ही हुई थी — और यह उनकी पहली सक्रिय पोस्टिंग थी। (Pratahkal) इतनी शानदार पृष्ठभूमि — और इतनी जल्दी पतन।

कैसे हुई ACB की कार्रवाई?
परिवादी ने ACB को शिकायत दी कि रीडर दिनेश सैनी ने जमीन की फाइनल डिक्री जारी करने के बदले SDM काजल मीणा के लिए ₹50,000 और स्वयं के लिए ₹10,000 — कुल ₹60,000 की मांग की है।

ACB DGP गोविंद गुप्ता के अनुसार शुरू में ₹1 लाख की मांग थी, जो बाद में घटाकर ₹50,000 की गई।

16 अप्रैल 2026 को परिवादी को नादौती उपखंड कार्यालय बुलाया गया। जैसे ही ₹60,000 की रकम आरोपियों तक पहुंची, ACB की टीम ने मौके पर तीनों को रंगे हाथों दबोच लिया।

दफ्तर से ₹4 लाख बरामद — "1 दिन का कलेक्शन"
₹60,000 की रिश्वत के अलावा वरिष्ठ सहायक प्रवीण धाकड़ के बैग से ₹4 लाख नकद और बरामद हुए।

पूछताछ में पता चला कि यह महज एक दिन का "कलेक्शन" था — अर्थात् यह घूसखोरी का नियमित कारोबार था।
इस ऑपरेशन की निगरानी DIG डॉ. रामेश्वर सिंह ने की, जबकि ACB सवाई माधोपुर टीम का नेतृत्व ASP ज्ञान सिंह चौधरी ने किया।

यह मामला कई स्तरों पर झकझोरता है।
पहला स्तर: काजल मीणा कोई साधारण अधिकारी नहीं — IIT स्नातक, EPFO अधिकारी, RAS में ST प्रथम रैंक। उनकी उपलब्धि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा थी। उस प्रेरणा को उन्होंने स्वयं ध्वस्त कर दिया।
दूसरा स्तर: ₹4 लाख का "एक दिन का कलेक्शन" बताता है कि यह कोई पहली बार नहीं था। पहली पोस्टिंग के महज 6 महीनों में इतना बड़ा "तंत्र" बनाना — यह अकेले नहीं होता। व्यवस्था की जड़ें कहाँ तक गई हैं, इसकी जाँच होनी चाहिए।
तीसरा स्तर: जमीन की डिक्री — एक आम नागरिक का सबसे बुनियादी अधिकार — उसे भी "खरीदना" पड़े, यह न्याय व्यवस्था के लिए कलंक है।
मॉक इंटरव्यू का वह जवाब आज भी कानों में गूंजता है — "लोगों की जिंदगी बदलूंगी।"
बदली ज़िंदगी — पर किसकी?

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