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वीर क्रांतिकारी तात्या टोपे को बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि ब्रह्म विभूति स्मृति न्यास ने किया नमन, वीरता और त्याग को किया याद

झांसी । मा भारती की स्वतंत्रता के लिए अपने रक्त से त्याग और बलिदान की अमर गाथा लिखने वाले महान क्रांतिकारी तात्या टोपे को उनके बलिदान दिवस (17 अप्रैल) पर ब्रह्म विभूति स्मृति न्यास द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम पं. अरविंद वशिष्ठ जी के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।

न्यास के अध्यक्ष पंडित संजय दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि तात्या टोपे 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानायक थे। उन्होंने अपनी अद्वितीय सैन्य रणनीति और गुरिल्ला युद्ध प्रणाली से अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी। उनका जीवन त्याग, साहस और देशभक्ति की अनुपम मिसाल है।
उन्होंने बताया कि तात्या टोपे का जन्म 1814 में महाराष्ट्र के नासिक के निकट येवला ग्राम में हुआ था। उनके पिता पाण्डुरंग राव भट्ट पेशवा बाजीराव द्वितीय के दरबार में कार्यरत थे। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर पेशवा ने उन्हें रत्नजटित टोपी भेंट की, जिसके बाद वे ‘तात्या टोपे’ के नाम से प्रसिद्ध हुए।
न्यास के पदाधिकारियों ने बताया कि 1857 के संग्राम में नाना साहेब के नेतृत्व में तात्या टोपे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान के बाद भी उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा और अपनी युद्ध कुशलता से उन्हें लगातार चुनौती देते रहे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने तात्या टोपे के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
गौरतलब है कि इस महान योद्धा को 17 अप्रैल 1859 को मध्यप्रदेश के शिवपुरी में फांसी दी गई थी, किंतु उनका बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।
इस अवसर पर पं. अवधेश मकड़ारिया, अभिषेक दीक्षित, पं. निखिल पाठक, पं. अंकुर गोस्वामी, पं. कार्तिक पटेरिया, पं. आशीष बाजपेयी, पं. महेश शर्मा, पं. राजीव करौलिया, पं. पवन तिवारी, पं. राहुल मिश्रा, मदन तिवारी, गौरव त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।।।

कार्यक्रम का संचालन पं. अशोक पाण्डेय द्वारा किया गया।

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