*प्रसिद्ध शायर आरके भगत के नव प्रकाशित काव्य संग्रह “मिलेगी न ज़िंदगी दोबारा” का विमोचन, चर्चा एवं काव्य गोष्ठी आयोजित*
मनोज शर्मा, चंडीगढ़ । संवाद साहित्य मंच एवं आचार्यकुल, चण्डीगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में सेक्टर 43 स्थित कम्युनिटी सेंटर में एक साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध शायर आर. के. भगत के नव प्रकाशित काव्य संग्रह “मिलेगी न ज़िंदगी दोबारा” का विधिवत विमोचन, समीक्षा चर्चा तथा काव्य पाठ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. सौभाग्य वर्धन बृहस्पति उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रिं. बहादुर सिंह गोसल उपस्थित रहे जबकि अध्यक्षता श्रीमती प्रेमलता (पार्षद) तथा समाजसेवी के. के. शारदा ने की। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध शायरा डॉ. संगीता शर्मा कुंद्रा ‘गीत’ द्वारा किया गया, जबकि प्रो. पल्लवी रामपाल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कविवर आर. के. भगत ने अपनी रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए अपनी चुनिंदा कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया। मुख्य अतिथि प्रो. बृहस्पति ने अपने संबोधन में कहा कि कवि ने जीवन के विभिन्न पहलुओं को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किया है। उनकी कविताएं और ग़ज़लें आम जनमानस के जीवन से गहराई से जुड़ी हुई हैं। अध्यक्ष अध्यक्ष के रूप में बोलते हुए के. के .शारदा ने कहा कि श्री भगत की साहित्यिक यात्रा के साथ हम शुरू से जुड़े हुए हैं और उम्मीद करते हैं कि उनके साहित्यिक यात्रा ऐसे ही जारी रहेगी ।पार्षद, प्रेमलता ने भी श्री भगत को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने बहुत ही सुंदर कविताएं लिखी हैं। पुस्तक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए साहित्यकार प्रेम विज ने कहा कि यह काव्य संग्रह केवल रचनाओं का संकलन नहीं, बल्कि जीवन के विविध रंगों, विरोधाभासों और अनुभवों का सजीव प्रतिबिंब है। वहीं डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि आर. के. भगत की रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाएं और गहन चिंतन स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं। कार्यक्रम में अजय भगत एवं राज विज ने भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर कवि के परिवार से उनकी पत्नी सुदेश, बहू संध्या, पोत्र ध्रुव एवं पोत्री टीना भी उपस्थित रहे। काव्य गोष्ठी के अंतर्गत नीना सैनी, विमला गुगलानी, किरण आहूजा, डॉ. शशि प्रभा, डॉ. प्रज्ञा शारदा, सुरिंदर कुमार, प्रो. पल्लवी रामपाल, कर्म सिंह ‘वकील’, बी. डी. ठाकुर, ललिता पुरी एवं डॉ. संगीता शर्मा कुंद्रा ‘गीत’ ने अपनी-अपनी रचनाओं का सुंदर पाठ किया ।