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भाजपा ने “नितीश ही विकल्प” वाले नारे से बनाई दूरी, सियासत में हलचल तेज

सहरसा/बिहार | संवाददाता
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जिस नारे के साथ भारतीय जनता पार्टी ने पहले “नितीश ही विकल्प” का समर्थन किया था, अब उसी से दूरी बनाती नजर आ रही है। यह बदलाव राज्य की सियासी दिशा और आगामी चुनावों को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा अब अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए स्वतंत्र रूप से राजनीतिक जमीन मजबूत करने पर जोर दे रही है। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ पहले जैसे संबंध नहीं दिख रहे हैं, जिससे गठबंधन की मजबूती पर भी सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव आगामी चुनाव को देखते हुए किया जा रहा है, जहां भाजपा अपने दम पर ज्यादा सीटें हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे राज्य में गठबंधन की राजनीति पर भी असर पड़ सकता है।
🗣️ अबू बकर उर्फ पप्पू (जिला परिषद उम्मीदवार, महिषी उत्तरी) ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि
“जनता अब नारों से नहीं, काम से प्रभावित होती है। बार-बार बदलती राजनीतिक रणनीति से आम लोगों का भरोसा टूट रहा है। नेताओं को स्थिरता और विकास पर ध्यान देना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि जनता को चाहिए कि वे सोच-समझकर अपने प्रतिनिधि का चयन करें, ताकि क्षेत्र का वास्तविक विकास हो सके।

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