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मुरादाबाद के डियर पार्क (वन चेतना विभाग) में चलती फिरती मौत है रसैल वाइपर! फुंकार से ही कांप उठते हैं लोग, इसका काटा पानी भी नहीं मांगता...

मुरादाबाद वाइपर एक ऐसा सांप है जो आधे सेकंड में आपको डस के और कुछ ही देर में आपको मौत के घाट उतार सकता है। रसल वाइपर अपने जहर के लिए तो कुख्यात है ही लेकिन साथ ही एक बहुत रोचक बात के लिए भी मशहूर है। वो है इस सांप की प्रजनन पद्धति। इसी कारण से यह सांप चर्चा में बना रहता है।रसल वाइपर अंडे नहीं देते बल्कि सीधे सपोलों यानी बच्चों को जन्म देते हैं। और अपना विष वह अपने बच्चों को जन्म के साथ जीन में देता है। इस सांप के सपोले जन्म से ही इतने जहरीले होते हैं कि कुछ ही मिनटों में किसी को भी हमेशा की नींद सुला दें।इसका जहर सबसे खतरनाक जहर में से एक है। यह अपने शिकार को एक बार डस दे तो शिकार का खून गाढ़ा होने लगता है। खून जैलीनुमा जमने लगता है, अंदर खून के थक्के बनने लगते हैं। किडनी और दिल फेल हो सकता है और समय पर इलाज न मिलने पर इसका शिकार यमराज जी के पास पहुंच सकता है। भारत में सांप से होने वाली मौतों में रसल वाइपर का बहुत बड़ा हिस्सा है।रसल वाइपर की एक और खास बात है कि वह इंसानी आबादी के आस पास ही अपना बसेरा बनाता है। इस तरह यह इंसानों पर एक खतरे की तरह हमेशा घूमता रहता है। घर और खेतों में यह अधिकतर पाया जाता है क्योंकि ऐसी जगहों पर शिकार मिलना बहुत आसान हो जाता है। इस शिकारी को "फॉर्मर किलर स्नेक" भी कहा जाता है। वाइपर आमतौर पर चूहे, मेंढक, छिपकली और छोटे पक्षियों को खाता है। शिकार को देखते ही यह बिल्कुल स्थिर हो जाता है और मौका पाते ही बिजली की तेजी से वार करता है।वाइपर का शरीर मोटा और भारी होता है। इसकी लंबाई एक से डेढ़ मीटर तक की होती है। शरीर पर भूरे और पीले रंग ने गहरे गोल धब्बे होते हैं। इन्हीं निशानों से इसे पहचानने में मदद मिलती है। सिर चौड़ा होता है और आंखें चमकदार। रसल वाइपर जितना खतरनाक है उतना ही इकोसिटम के लिए जरूरी भी है। यह छोटे जानवर जैसे मेंढक, छिपकली आदि की संख्या को बैलेंस करने का काम करता है।

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