कविता: “देश की मिट्टी”
देश की मिट्टी में खुशबू है,
शहीदों के अरमानों की,
हर कण में बसी कहानी है,
वीरों की बलिदानों की।
यह मिट्टी सोना उगाती है,
मेहनत के पसीने से,
हर खेत में लहराती है,
उम्मीदें अपने सीने से।
जब-जब इस पर कदम पड़े,
सीना गर्व से भर जाता है,
इसकी गोद में पलने वाला,
हर दर्द को सह जाता है।
सीमा पर जो खड़े हुए,
उसकी खातिर जान लुटाते,
इस मिट्टी की रक्षा में,
हंसते-हंसते शीश झुकाते।
माँ की ममता, बाप का साया,
सब इसमें समाया है,
देश की इस पावन मिट्टी ने,
हम सबको अपनाया है।
आओ मिलकर कसम ये खाएँ,
इसे कभी न झुकने देंगे,
देश की इस पवित्र धरा को,
हम सदा ऊँचा ही रखेंगे। 🇮🇳