“शिक्षा में रामत्व” विषय पर एक दिवसीय विस्तृत व्याख्यान का आयोजन
खानपुर कलां, 17 अप्रैल।
भारतीय शिक्षण मंडल हरियाणा के 57वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां के शिक्षा विभाग के सभागार में “शिक्षा में रामत्व” विषय पर एक दिवसीय विस्तृत व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शिक्षा विभाग एवं भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें शिक्षकों, शोधार्थियों एवं छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. सुदेश ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेन्द्र अनायत एवं मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय महिला गतिविधि की सह प्रमुख डॉ. विभूति गौड़ उपस्थित रहीं। कुलसचिव प्रो. शिवालिक यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री अमित गुलेरिया द्वारा ध्येय श्लोक के गान से हुआ। इसके पश्चात श्री दिलबाग शास्त्री ने भारतीय शिक्षण मंडल की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए संगठन के उद्देश्य “शिक्षा में भारतीयता” पर प्रकाश डाला। उन्होंने मंडल के कार्यों, विभिन्न गतिविधियों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्माण में उसकी भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया। साथ ही श्री राम नारायण अवस्थी के उदाहरण के माध्यम से संगठन के सदस्यों के त्याग और समर्पण की प्रेरणादायक चर्चा की।मुख्य अतिथि प्रो. राजेन्द्र अनायत ने अपने संबोधन में “शिक्षा में रामत्व” के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है जो व्यक्ति के भीतर त्याग, सत्य और अनुशासन के गुण विकसित करे। उन्होंने छात्राओं को भिक्षु और सत्याग्रही जैसी दृढ़ एवं संयमित प्रवृत्ति अपनाने का संदेश दिया।मुख्य वक्ता डॉ. विभूति गौड़ ने विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि “शिक्षा में रामत्व” वर्तमान समाज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में तीव्र विकास हो रहा है, किंतु उसकी दिशा का निर्धारण मूल्यों पर आधारित शिक्षा ही कर सकती है। उन्होंने भारतीय सभ्यता को आध्यात्मिकता एवं संस्कारों की धरोहर बताते हुए कहा कि बच्चों में मूल्य शिक्षा का आरंभ घर और विद्यालय दोनों स्तरों पर होना चाहिए।अध्यक्षीय संबोधन में कुलगुरु प्रो. सुदेश ने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण से रामत्व की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने श्रीराम और सीता के जीवन संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि धैर्य, मर्यादा और संघर्ष जैसे गुणों को शिक्षा प्रणाली में समाहित करना आवश्यक है। उन्होंने जीवन में उद्देश्यपूर्ण शिक्षा और मूल्य आधारित दृष्टिकोण को अपनाने पर बल दिया।कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव प्रो. शिवालिक यादव ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भी “शिक्षा में रामत्व” की अवधारणा अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने सभी को अपने जीवन में राम के आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया।कार्यक्रम का समापन प्रार्थना, कल्याण मंत्र एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर संयोजिका प्रो. रीना रानी, मंच संचालन डॉ. गोल्डी गुप्ता एवं सुश्री अंकिता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. वरुणा तेहलान दहिया, डीन शिक्षा विभाग प्रो. अनु बल्हारा, संकाय सदस्य एवं छात्राएँ उपस्थित रहीं।फोटो कैप्शन :-
01 दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम को शुभारंभ करते कुलगुरु प्रो सुदेश व मुख्य अतिथि प्रो राजेंद्र अनायत .02 “शिक्षा में रामत्व” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि।