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कविता: “नारी शक्ति”


नारी है शक्ति, नारी है आधार,
उससे ही जग में हर एक संचार।
ममता की मूरत, साहस की पहचान,
उसके बिना अधूरा हर एक इंसान।

कभी वो माँ बनकर स्नेह लुटाती,
कभी बहन बनकर राह दिखाती।
पत्नी बन जीवन में रंग भरती,
हर रिश्ते में खुशियों की ज्योति धरती।

आँधियों से लड़ना उसे आता है,
हर मुश्किल में खुद को संभाल पाती है।
नहीं कमजोर, वो चट्टान समान,
हर बाधा को करती आसान।

कलम उठाए तो इतिहास लिखे,
कदम बढ़ाए तो नई राह दिखे।
हर क्षेत्र में बढ़ती उसकी पहचान,
अब ऊँचा है उसका सम्मान।

ना रोको उसे, ना बाँधो बंधन में,
उड़ने दो उसे खुले आकाश में।
नारी है तो सृष्टि है, जीवन का सार,
नारी शक्ति से ही सजा संसार। ✨

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