logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

तामलोर (बाड़मेर) में सामाजिक समरसता की अनूठी पहल, राजपूत समाज ने मेघवाल समाज के व्यक्ति का किया सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार



बाड़मेर। जिले के तामलोर गांव में आज एक ऐसी घटना सामने आई जिसने सामाजिक एकता और भाईचारे की नई मिसाल कायम कर दी। मेघवाल समाज के एक व्यक्ति के निधन के बाद, राजपूत समाज के लोगों ने अपने श्मशान में पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उनका दाह संस्कार कराया।

यह पहल केवल एक अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं रही बल्कि समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने और आपसी समरसता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। अंतिम संस्कार के दौरान दोनों समाजों के लोगों ने मिलकर सहयोग किया और एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव प्रदर्शित किया।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इससे पहले कई बार ऐसी परिस्थितियों में संबंधित समाज के लोगों को मुस्लिम समुदाय के कब्रिस्तान में दफनाना पड़ता था, जो उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं था। ऐसे में यह निर्णय समाज के भीतर सकारात्मक बदलाव और जागरूकता का संकेत है।सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि यह घटना आने वाले समय में अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। उन्होंने इसे “सामाजिक समरसता और समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया।
इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य लोगों ने कहा कि समाज में ऊंच-नीच और भेदभाव को खत्म कर सभी को समान अधिकार और सम्मान देना ही सच्ची मानवता है। इस प्रकार के प्रयास समाज को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तामलोर की यह पहल यह दर्शाती है कि यदि समाज सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े, तो वर्षों से चली आ रही कुरीतियों और भेदभाव को समाप्त किया जा सकता है।यह घटना न केवल मारवाड़, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणास्रोत बन सकती है, जो सामाजिक सौहार्द और एकता को मजबूत करने का संदेश देती है।

1
401 views

Comment