बड़ी जीत: 2 महीने का संघर्ष और भूख हड़ताल लाई रंग, प्रशासन ने 20 दिनों में मुआवजा देने का दिया लिखित आश्वासन
बिलाईगढ़। "जमीन गई पर मुआवजा नहीं" की लड़ाई लड़ रहे किसान और भीम रेजिमेंट के कार्यकर्ताओं के धैर्य की आखिरकार जीत हुई है। पिछले दो महीनों से जारी निरंतर आंदोलन और SDM कार्यालय के समक्ष बेमियादी भूख हड़ताल के बाद, बिलाईगढ़ प्रशासन ने झुकते हुए 20 दिनों के भीतर मुआवजा राशि भुगतान करने का लिखित आदेश जारी कर दिया है।
भीम रेजिमेंट के नेतृत्व में सफल हुआ आंदोलन
अपर सोनिया जलाशय परियोजना से प्रभावित किसान रमेशर उर्फ रामेश्वर को न्याय दिलाने के लिए भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ के प्रदेश सचिव मनीष चेलक के नेतृत्व में युवाओं ने मोर्चा खोल रखा था। 16 अप्रैल से SDM कार्यालय के बाहर शुरू हुई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल ने प्रशासन की नींद उड़ा दी, जिसके परिणामस्वरूप महज 24 घंटे के भीतर प्रशासन को लिखित गारंटी देनी पड़ी।
प्रशासन का सख्त आदेश: 20 दिन की समय-सीमा
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बिलाईगढ़ द्वारा जारी पत्र (क्रमांक LA/01/2026) में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि:
किसान को देय मुआवजा राशि का भुगतान 20 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।
भुगतान सीधे किसान के खाते में DBT के माध्यम से होगा।
यदि तय समय में भुगतान नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
संघर्ष अभी थमा नहीं है: मनीष चेलक
भीम रेजिमेंट के प्रदेश सचिव मनीष चेलक ने कहा, "यह संवैधानिक संघर्ष की जीत है। हमने शांतिपूर्ण तरीके से अपना हक मांगा और प्रशासन को मजबूर होकर आदेश जारी करना पड़ा। लेकिन हमारी नजर अभी भी 20 दिनों की समय-सीमा पर है। यदि प्रशासन अपने वादे से मुकरा, तो आंदोलन इससे भी बड़ा और उग्र होगा।"
क्षेत्र में चर्चा का विषय
यह मामला बिलाईगढ़ क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे किसान की दृढ़ इच्छाशक्ति और सामाजिक संगठन की एकजुटता की मिसाल मान रहे हैं। किसान रमेशर ने भी इस जीत पर संतोष व्यक्त किया है, लेकिन वे भी भुगतान होने तक सतर्क हैं।
रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, AIMA Media 24
स्थान: बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़
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