यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल सेक्टर-88, फरीदाबाद ने गंभीर पॉलीट्रॉमा मरीज को दी नई जिंदगी, और पलवल के मलिक हॉस्पिटल में शुरू हुई ऑर्थोपेडिक्स ओपीडी
ब्यूरो संवाददाता :- प्रवीण कुकरेजा
9991011999
पलवल, 17 अप्रैल 2026: यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद ने पलवल के 54 वर्षीय एक पुरुष मरीज का सफलतापूर्वक इलाज कर एक कॉम्प्लेक्स पॉलीट्रॉमा केस को संभालने में बड़ी सफलता हासिल की है। मरीज ऊंचाई से गिरने के कारण कई गंभीर चोटों से ग्रसित था। यह एक अत्यंत कॉम्प्लेक्स ऑर्थोपेडिक ट्रॉमा केस था, जिसमें तुरंत और सटीक इलाज की आवश्यकता थी। डॉक्टरों की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए स्टेज्ड सर्जरी के माध्यम से ORIF (ओपन रिडक्शन एंड इंटरनल फिक्सेशन) तकनीक और टाइटेनियम प्लेटिंग का उपयोग कर मरीज का सफल उपचार किया।
इस उपलब्धि को साझा करने के लिए आयोजित एक अवेयरनेस सेशन में यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी, डॉ. अंकुर धीमान ने इस तरह के कॉम्प्लेक्स मामलों में आने वाली चुनौतियों और एडवांस टेक्नोलॉजी की भूमिका पर प्रकाश डाला।
इसी दौरान अस्पताल ने पलवल में मलिक हॉस्पिटल के साथ साझेदारी में अपनी विशेष ऑर्थोपेडिक्स ओपीडी सेवा शुरू करने की घोषणा भी की। इस पहल के तहत डॉ. अंकुर धीमान हर शुक्रवार सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक मरीजों के लिए उपलब्ध रहेंगे। इस सेवा का उद्देश्य स्थानीय निवासियों को उनके नजदीक ही विशेषज्ञ परामर्श और बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है, ताकि समय पर डायग्नोसिस और उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
केस के बारे में विस्तार से बताते हुए यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी, डॉ. अंकुर धीमान ने कहा, “यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण केस था, जिसमें शरीर के महत्वपूर्ण जोड़ों में कई कॉम्प्लेक्स फ्रैक्चर शामिल थे। मरीज के दाएं फीमर में कमिन्यूटेड इंट्रा-आर्टिकुलर फ्रैक्चर, दाएं ह्यूमरस में गंभीर डिस्प्लेस्ड फ्रैक्चर और डिस्टल रेडियस में चोट थी। हमारी टीम ने विस्तृत जांच के बाद स्टेज्ड सर्जिकल प्लान तैयार किया, ताकि बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें। जनरल एनेस्थीसिया के तहत ORIF तकनीक के जरिए टाइटेनियम इम्प्लांट्स से प्लेटिंग की गई। समय पर सर्जरी और सटीक पोस्ट-ऑपरेटिव केयर ने मरीज को स्थिर करने और लंबी अवधि की विकलांगता से बचाने में अहम भूमिका निभाई।”
सर्जरी के बाद मरीज को एंटीबायोटिक्स, पेन मैनेजमेंट, फिजियोथेरेपी और सपोर्टिव केयर दी गई। नियमित मॉनिटरिंग और रिहैबिलिटेशन के चलते मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और उन्होंने उपचार के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। स्थिर स्थिति में उन्हें डिस्चार्ज किया गया, साथ ही आगे के फॉलो-अप और दवाइयों के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
डॉ. धीमान ने आगे कहा, “पॉलीट्रॉमा मामलों में सिर्फ सर्जिकल एक्सपर्टीज ही नहीं, बल्कि एक समन्वित मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच की भी जरूरत होती है। इमरजेंसी स्टेबलाइजेशन से लेकर एडवांस इमेजिंग, सर्जिकल प्रिसिशन और रिहैबिलिटेशन तक हर चरण मरीज की रिकवरी में महत्वपूर्ण होता है। शुरुआती फिजियोथेरेपी और निरंतर मॉनिटरिंग से मरीज की मूवमेंट और फंक्शन को बहाल करने में मदद मिली। हमारा लक्ष्य हमेशा यही रहता है कि मरीज जल्द से जल्द और सुरक्षित तरीके से अपनी सामान्य जिंदगी में लौट सके। यह केस समय पर इलाज और एडवांस ऑर्थोपेडिक सुविधाओं की उपलब्धता के महत्व को दर्शाता है।”
यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लगातार एडवांस और पेशेंट-सेंट्रिक हेल्थकेयर सेवाएं प्रदान करने के अपने संकल्प को मजबूत कर रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुभवी विशेषज्ञों और क्लिनिकल एक्सीलेंस पर फोकस के साथ, अस्पताल क्षेत्र में कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा मामलों के प्रबंधन में अग्रणी बना हुआ है। पलवल में शुरू की जा रही नई ओपीडी सेवाएं आसपास के लोगों तक उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उसके मिशन को और मजबूत करती हैं।