रहस्यों से घिरा बसंतराय माता पोखर: जिसकी गहराई आज तक नहीं नाप सका कोई, बिसुआ पर्व पर उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
गोड्डा/बसंतराय (झारखंड):
झारखंड के गोड्डा जिला अंतर्गत बसंतराय क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध बसंतराय माता पोखर आज भी रहस्य, आस्था और लोकमान्यताओं का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह प्राचीन पोखर किसी राजा-महाराजा अथवा पूर्वजों द्वारा खुदवाया गया था, हालांकि इसके निर्माण काल का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
बताया जाता है कि यह विशाल पोखर इतना विस्तृत है कि इसकी परिधि लगभग तीन किलोमीटर के आसपास मानी जाती है। इसकी वास्तविक गहराई आज तक कोई नहीं नाप सका है।
बिसुआ पर्व पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़
हर वर्ष बिसुआ पर्व के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु मन्नत और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
विशेष रूप से संथाल समुदाय के श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां उपस्थित होकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना करते हैं और माता के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
इस दौरान अनेक श्रद्धालु पवित्र मानकर पोखर में स्नान भी करते हैं।
यादव युवक की रहस्यमयी कथा आज भी चर्चित
ग्रामीणों के अनुसार वर्षों पूर्व एक यादव युवक ने दावा किया था कि वह इस विशाल पोखर को तैरकर पार कर लेगा। किंवदंती है कि प्रयास के दौरान उसके पैर में रहस्यमयी जंजीर फंस गई और अंततः वह पोखर में समा गया।
पोखर से निकलती थीं थालियाँ और बर्तन!
स्थानीय मान्यता है कि प्राचीन समय में श्रद्धालुओं की मांग पर भोजन हेतु थाली, लोटा आदि बर्तन पोखर से स्वयं निकलते थे। बाद में लोगों द्वारा वापस न करने के कारण यह चमत्कार बंद हो गया।
आज भी उगते हैं विशाल पुरैण के पत्ते
ग्रामीणों के अनुसार इसके बाद पोखर में बड़े-बड़े मजबूत पुरैण के पत्ते उगने लगे, जिनका उपयोग लोग पत्तल के रूप में करते हैं।
आस्था, रहस्य और परंपरा का अद्भुत संगम
बसंतराय माता पोखर केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, परंपरा और रहस्यमयी लोककथाओं का जीवंत केंद्र है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं।
(नोट: समाचार में वर्णित कुछ घटनाएँ स्थानीय जनश्रुतियों एवं ग्रामीणों द्वारा बताई गई मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका स्वतंत्र ऐतिहासिक/वैज्ञानिक सत्यापन उपलब्ध नहीं है।)