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ग्रीष्म ऋतु में रखें विशेष सावधानी, तापघात से बचाव हेतु अपनाएं जरूरी उपाय

ग्रीष्म ऋतु में रखें विशेष सावधानी, तापघात से बचाव हेतु अपनाएं जरूरी उपाय

ग्रीष्म ऋतु में तापमान बढ़ने एवं गर्म हवाओं (लू) के प्रभाव से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। विशेष रूप से वृद्धजन, बच्चे, खिलाड़ी एवं धूप में कार्य करने वाले श्रमिक वर्ग इस मौसम में अधिक जोखिम में रहते हैं।

अत्यधिक गर्मी एवं तापघात के प्रमुख लक्षणों में पसीना न आना, त्वचा का गर्म, लाल एवं शुष्क होना, मतली, सिरदर्द, अत्यधिक थकान, चक्कर आना, उल्टियां होना, बेहोशी तथा पुतलियों का सिकुड़ना शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल सतर्कता बरतना आवश्यक है।

तापघात से बचाव हेतु नागरिकों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने एवं खाली पेट न रहने की सलाह दी गई है। साथ ही शराब, चाय एवं कॉफी के अत्यधिक सेवन से बचें। ठंडे पानी से स्नान करें, सिर को ढककर रखें तथा हल्के रंग के ढीले एवं पूर्ण आस्तीन वाले वस्त्र पहनें।

बच्चों को कभी भी बंद वाहनों में अकेला न छोड़ें। दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। धूप में नंगे पैर न चलें तथा अत्यधिक भारी कार्य करने से परहेज करें।

यदि बाहर निकलना अनिवार्य हो, तो छतरी एवं धूप के चश्मे का उपयोग करें तथा घर से निकलने से पूर्व कम से कम दो गिलास पानी अवश्य पिएं। बुखार या तापघात की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र/अस्पताल से संपर्क कर आवश्यक उपचार प्राप्त करें।

ओ.आर.एस. घोल, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी एवं ताजे फलों के रस का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होता है और गर्मी के प्रभाव से बचाव में उपयोगी है।

उपरोक्त सावधानियां अपनाकर हम स्वयं को एवं अपने परिवार को ग्रीष्म ऋतु के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रख सकते हैं।
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