*बिना पारदर्शिता के निर्माण पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज।*
मिर्जापुर (पड़री/पहाड़ी):
पहाड़ी ब्लॉक कार्यालय परिसर में निर्मित एक भवन अब गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसे सीधे तौर पर “भ्रष्टाचार की मिसाल” करार दिया है। उनका कहना है कि इस भवन पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता पूरी तरह गायब रही।
ग्रामीणों के अनुसार, सबसे अहम सवालों—जैसे निर्माण किस योजना या बजट से हुआ, किस अधिकारी ने प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति दी, टेंडर प्रक्रिया कैसे अपनाई गई, स्वीकृत लागत कितनी थी और वास्तविक खर्च कितना हुआ—पर विभाग पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। यहां तक कि कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र तक की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई।
आरोप है कि जब भी इन बिंदुओं पर जानकारी मांगी जाती है, तो संबंधित अधिकारी और ग्राम सचिव टाल-मटोल करते हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि निर्माण कार्य में नियमों और गुणवत्ता की अनदेखी की गई है।
स्थानीय वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील यादव ने भी इस मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों का जानकारी देने से बचना खुद ही पूरे निर्माण कार्य को संदिग्ध बनाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इसमें बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है।
मामले की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर भी दर्ज कराई जा चुकी है (शिकायत संख्या: 40019926009892 एवं 40019926009766), लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पहाड़ी ब्लॉक में यह कोई पहला मामला नहीं है। पहले भी बिना उचित स्वीकृति के कार्य कराकर बाद में कागज़ी औपचारिकताएं पूरी कर भुगतान लेने के आरोप सामने आते रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग:
जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन इस “भवन रहस्य” से पर्दा उठाएगा, या फिर फाइलों में ही दफन हो जाएगा सच?