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अमेरिकी सीनेट में हुए हालिया वोट ने इजराइल को हथियार सप्लाई पर बड़ा संदेश दिया है, लेकिन ट्रंप की कुर्सी अभी खतरे में नहीं

अमेरिकी सीनेट में हुए हालिया वोट ने इजराइल को हथियार सप्लाई पर बड़ा संदेश जरूर दिया है, लेकिन ट्रंप की कुर्सी अभी खतरे में नहीं दिख रही। यह घटना 15 अप्रैल 2026 को हुई, जब सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने दो प्रस्ताव पेश किए एक $295 मिलियन के बुलडोजरों की बिक्री रोकने का और दूसरा $152 मिलियन की 1,000-पाउंड बमों की। 47 डेमोक्रेटिक सीनेटरों में से 40 ने बुलडोजर वाले प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया (40-59 से असफल) और 36 ने बम वाले के पक्ष में (36-63 से असफल)। रिपब्लिकन और सिर्फ 7 डेमोक्रेट्स (जिनमें चक शूमर, कर्स्टन गिलिब्रैंड, जॉन फेटरमैन आदि शामिल) ने इनका विरोध किया, जिससे ट्रंप प्रशासन की इजराइल को हथियार सप्लाई जारी रही। यह वोट इजराइल-फिलिस्तीन, लेबनान और अब ईरान युद्ध के संदर्भ में हुआ, जहां नेटanyahu की नीतियों पर डेमोक्रेट्स के अंदर असंतोष बढ़ रहा है। अमेरिका-इजराइल रिश्तों में दरार? हां, डेमोक्रेटिक पार्टी में साफ दरार दिख रही है। पिछले वोट्स (2025 में सिर्फ 15-27 डेमोक्रेट्स सपोर्ट करते थे) की तुलना में यह रिकॉर्ड है। कई डेमोक्रेट्स का कहना है कि नेटanyahu की सरकार गाजा, वेस्ट बैंक और लेबनान में नागरिकों पर अत्याचार कर रही है, और ईरान युद्ध ने इसे और बदतर बना दिया। अमेरिकी जनमत सर्वेक्षणों में भी 60% लोग (खासकर 3/4 डेमोक्रेट्स) इजराइल को हथियार भेजने के खिलाफ हैं। लेकिन रिपब्लिकन बहुमत वाली सीनेट में ये प्रस्ताव पास नहीं हुए, इसलिए नीति नहीं बदली। ट्रंप की कुर्सी पर सीधा खतरा नहीं क्योंकि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है और ट्रंप अभी भी अपनी पार्टी में मजबूत हैं। फिर भी, यह 2026 मिडटर्म इलेक्शन और लंबे समय में डेमोक्रेटिक रणनीति पर असर डाल सकता है। UN Human Rights Council की अपील सही है। UN Human Rights Council के एक्सपर्ट्स ने 15 अप्रैल को इजराइल की लेबनान बमबारी (8 अप्रैल को, पाकिस्तान-ब्रोकरेड US-ईरान सीजफायर के ठीक बाद) को “UN Charter का उल्लंघन” बताया और सभी सदस्य देशों से इजराइल को हथियार सप्लाई रोकने की अपील की। यह बाध्यकारी नहीं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा रहा है। बाकी मुद्दे जो वीडियो में कवर किए गए अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप प्रशासन के साथ इजराइल ने ईरान पर हमले किए, जिसके बाद पाकिस्तान ने सीजफायर ब्रोकर किया। अप्रैल की शुरुआत में पाकिस्तान में US-ईरान बातचीत हुई, लेकिन पूरा समझौता नहीं बना – हालांकि सीजफायर अभी भी fragile है। पाकिस्तान (PM शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ) को दोनों तरफ क्रेडिट मिल रहा है। भारत पर तेल खरीद: ट्रंप प्रशासन ने रूसी और ईरानी तेल पर सैंक्शन वेवर नहीं बढ़ाया (रूसी पर 11 अप्रैल को खत्म, ईरानी पर 19 अप्रैल को खत्म होने वाला)। इससे भारत (जो दोनों देशों से सस्ता तेल खरीदता है) पर असर पड़ेगा – ग्लोबल ऑयल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है। नई कूटनीति शुरू हो रही है? मिडिल ईस्ट में हां, कुछ हलचल है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से US-ईरान सीजफायर हुआ, जो पिछले दशकों में नया मोड़ है। लेकिन ट्रंप-नेटanyahu की “मैक्सिमम प्रेशर” पॉलिसी अभी जारी है। डेमोक्रेट्स का बढ़ता विरोध और UN का बयान दिखाता है कि अमेरिका के अंदर इजराइल के प्रति माहौल बदल रहा है – खासकर युवा और प्रोग्रेसिव वोटर्स में। निष्कर्ष: यह वोट “बड़ा भूचाल” तो है, लेकिन ट्रंप की पॉलिसी पर तुरंत असर नहीं डालेगा। यह डेमोक्रेटिक पार्टी में इजराइल नीति पर बहस को और तेज करेगा। मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद पाकिस्तान जैसी तीसरी तरफ की कूटनीति पर टिकी है, लेकिन ईरान युद्ध और गाजा संकट अभी जटिल बने हुए हैं। 🍳*हरबंस सिंह, सलाहकार* 🙏🏻 शहीद भगत सिंह एसोसिएशन पंजाब +91-8054400953,

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