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*निषाद (माझी) समाज की ओर से श्री अशोक अनीता सौंधिया जी बने यजमान*

*समरसता के संगम में सर्वसमाज की ऐतिहासिक भागीदारी,*
*निषाद (माझी) समाज की ओर से श्री अशोक अनीता सौंधिया जी बने यजमान*
जबलपुर : आयुर्वेदिक कॉलेज प्रेक्षागृह, जबलपुर में 5 अप्रैल 2026 से 13 अप्रैल 2026 तक आयोजित भव्य रामकथा में सामाजिक समरसता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। इस आयोजन का संचालन समरसता सेवा संगठन, जबलपुर के तत्वावधान में तथा आयोजक श्री संदीप कुमार जैन के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक किया गया।
कथा वाचन विश्वविख्यात संत, तुलसी पीठाधीश्वर, पद्म विभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के श्रीमुख से हुआ। स्वामी रामभद्राचार्य जी एक प्रख्यात वेदज्ञ, संस्कृत के महान विद्वान, अनेक ग्रंथों के रचयिता एवं रामभक्ति परंपरा के अग्रणी संत हैं। दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने असाधारण स्मरण शक्ति एवं ज्ञान के बल पर देश-विदेश में सनातन धर्म, रामकथा और मानवीय मूल्यों का अद्वितीय प्रचार-प्रसार किया है। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही सर्वसमाज की सहभागिता, जिसमें
निषाद, ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, सिक्ख, बौद्ध, जैन, वनवासी एवं आदिवासी समाज के लोगों ने एक मंच पर आकर समरसता और भाईचारे का सशक्त संदेश दिया।
इसी क्रम में निषाद (माझी) समाज की ओर से वरिष्ठ समाजसेवी *श्री अशोक सौंधिया जी न्यासी निषाद समाज ट्रस्ट, श्रीमती अनिता अशोक सौंधिया जबलपुर को यजमान बनाया गया। उनके नेतृत्व में समाज के लोगों ने पूरे श्रद्धा, अनुशासन और गरिमा के साथ सहभागिता निभाई, जो समाज के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण रहा।
कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के प्रमुख जनों एवं परिवारों की सक्रिय उपस्थिति रही, जिनमें —
जबलपुर से राजेन्द्र सिंह केवट, अध्यक्ष निषाद समाज ट्रस्ट, गंगाराम सौंधिया, मकरंद केवट, हिमांशु रागनी सौंधिया, राघव सौंधिया, नत्थू लाल सौंधिया, राजेश सौंधिया, श्रीमती ममता राजेंद्र सिंह केवट, सीता रायकवार, गणेश सौंधिया, नीलम रायकवार, उर्मिला सौंधिया, रामचरण बर्मन, नीलम केवट सहित अनेक समाजबंधुओं ने अपनी सहभागिता देकर समरसता का उदाहरण प्रस्तुत किया।
साथ ही निषाद/माझी समाज के अंतर्गत आने वाले विभिन्न निषाद उपसमाज — माझी, धीमर, कश्यप, कहार, केवट, रैकवार, भील, मछुआरा, सौंधिया, निषाद बंजारा आदि के वरिष्ठजन, समाजसेवी एवं मातृशक्ति की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से 2 बजे तक पूजन तथा सायं 4 बजे से 8 बजे तक कथा एवं प्रवचन आयोजित किए गए। समापन अवसर पर सभी यजमानों का सम्मान एवं सामूहिक छायाचित्र लिया गया, जिससे यह आयोजन सभी के लिए यादगार बन गया।
निषाद/माझी समाज की इस गरिमामयी सहभागिता पर सभी यजमानों, विशेष रूप से श्री अशोक सौंधीया जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की गईं। साथ ही समरसता सेवा संगठन एवं आयोजक श्री संदीप कुमार जैन को इस प्रेरणादायक एवं सफल आयोजन के लिए साधुवाद दिया गया।
समाज के प्रबुद्धजनों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि समाज में एकता, समानता और समरसता को भी नई दिशा प्रदान करते हैं। यह आयोजन वास्तव में “सबका साथ, सबका सम्मान” की भावना का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

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