लावारिस महिला को मिला सम्मानजनक विदाई:
लावारिस महिला को मिला सम्मानजनक विदाई:
समाजसेवी बरकत अली बने मानवता की मिसाल
सार्थक टाइम्स
अंबेडकर नगर।
जनपद में इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की एक मार्मिक तस्वीर उस समय देखने को मिली, जब एक अज्ञात महिला के शव को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने का कार्य समाजसेवी बरकत अली द्वारा किया गया। यह घटना न केवल संवेदनशीलता का उदाहरण बनी, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी छोड़ गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 12 अप्रैल 2026 को गोशाईगंज रेलवे स्टेशन यार्ड में एक अज्ञात महिला का शव मिलने की सूचना पर अकबरपुर जीआरपी पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस टीम ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए महिला की पहचान कराने हेतु शव को पोस्टमार्टम हाउस में सुरक्षित रखवाया। काफी प्रयासों के बावजूद जब मृतका की पहचान नहीं हो सकी, तब आगे की प्रक्रिया को लेकर मानवीय पहल की जरूरत महसूस हुई।
मृतका का हुलिया गोरा रंग, उम्र लगभग 28 वर्ष बताई गई। वह काले रंग का सूट और लाल रंग की कमीज पहने हुए थी तथा उसके पैर में काले रंग का धागा बंधा हुआ था। तमाम कोशिशों के बावजूद जब कोई परिजन सामने नहीं आया, तो यह मामला पूरी तरह से लावारिस बन गया।
ऐसे संवेदनशील समय में जीआरपी थाना के हेड कांस्टेबल अनुराग यादव ने समाजसेवी बरकत अली से संपर्क कर शव के अंतिम संस्कार हेतु सहयोग का अनुरोध किया। बिना देर किए बरकत अली ने इसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी मानते हुए सहमति दी और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की व्यवस्था की।
बरकत अली ने मृतका के पहनावे और अन्य संकेतों के आधार पर उसे मुस्लिम समुदाय से संबंधित मानते हुए इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान हेड कांस्टेबल अनुराग यादव, कांस्टेबल विश्वजीत सिंह, हाफिज जावेद खान तथा पंकज वर्मा सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर एक अनजान महिला को सम्मानजनक विदाई दी।
इस पूरी घटना ने यह साबित कर दिया कि मानवता आज भी जिंदा है और समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं जो बिना किसी स्वार्थ के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। बरकत अली की यह पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा है कि किसी भी परिस्थिति में इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।
समाज को संदेश:
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि किसी भी अज्ञात या लावारिस व्यक्ति के प्रति भी हमारी जिम्मेदारी उतनी ही है, जितनी अपने परिजनों के प्रति होती है। समाजसेवी बरकत अली ने यह साबित कर दिया कि सच्ची सेवा वही है, जो निस्वार्थ और मानवता के लिए हो।
दिनेश कुमार चौधरी
ब्यूरो सार्थक टाइम्स
अंबेडकर नगर