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आदिचुंचनगिरि में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन, नौ जन-संकल्पों पर दिया जोर

बेंगलुरु/आदिचुंचनगिरि (दलपतसिंह भायल) 15 अप्रैल 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज की भागीदारी को विकास की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए देशवासियों से नौ प्रमुख संकल्पों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक इन संकल्पों को ईमानदारी से अपनाए, तो विकसित कर्नाटक और विकसित भारत का लक्ष्य शीघ्र हासिल किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण और प्रभावी जल प्रबंधन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इसे जनआंदोलन बनाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत वृक्षारोपण बढ़ाने, सार्वजनिक एवं धार्मिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने और ‘वोकल फॉर लोकल’ के जरिए स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन देने की अपील की।
इसके साथ ही उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने, मोटे अनाज को भोजन में शामिल करने, प्लास्टिक के उपयोग को सीमित करने, घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने, योग व फिटनेस को जीवन का हिस्सा बनाने तथा सेवा भावना को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने आदिचुंचनगिरि महासंस्थान मठ में श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन किया। यह मंदिर पूज्य श्री बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी की स्मृति में निर्मित स्मारक है, जो मठ के 71वें पीठाधीश्वर रहे और समाज सेवा के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री H. D. देवे गौड़ा के साथ ‘सौंदर्य लहरी’ और ‘शिव महिम्न स्तोत्रम’ ग्रंथों का विमोचन भी किया। इससे पहले उन्होंने व्यास पीठ का दर्शन कर पूजा-अर्चना की और श्री कालभैरव स्वामी मंदिर में श्रद्धा अर्पित की।
प्रधानमंत्री ने कर्नाटक की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि यहां परंपरा और ज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी के शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से गरीब और ग्रामीण वर्ग को बड़ी राहत मिली है।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं हर व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। इसी दिशा में केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना ने करोड़ों जरूरतमंदों को मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान की है, जिसमें अब बुजुर्गों को भी शामिल किया गया है।
अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान का भी अभिन्न हिस्सा है, जिसे हमें मिलकर मजबूत करना होगा।

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