धर्म यात्रा"
"धर्म यात्रा"
वो सब वाल्मीकि धर्म यात्रा पर निकले हुए लोग हैं जो समाज के शुभचिंतक है । समाज की चिंता करते हैं ।समाज में जागरूकता लाना चाहते हैं । चेतना लाना चाहते हैं । समाज के प्रति गंभीर है । तभी तो वाल्मीकि धर्म यात्रा पर निकले और जमीनी स्तर पर समाज के लोगों से मिलते हैं । घर घर जाकर समाज में पनप रही बुराईयों को जड़ से खत्म करने का प्रयास करते रहते हैं ।
समाज की नसों में -- नशा अनपढ़ता अन्धविश्वास पाखंड अन्ध श्रद्धा इस प्रकार समां चुकी है कि होश खोकर समाज बदहोश हो चुका है । सही और ग़लत की पहचान नहीं कर पा रहा है । अपने पूर्वजों से जो सुना वो सत्य था या फिर ये सच है जो वर्तमान में सुन रहे हैं । वर्तमान दौर में जो समाजिक प्रचार प्रसार है वो पूर्व के प्रचार-प्रसार के विपरीत है । बिल्कुल अलग है एक दम भिन्न है । समाज के रीता रिवाज त्योहार है व्यवहार सब विपरीत है ।
समाज की इन्हीं बुराईयों को जड़ से खत्म करने के लिए हम सब वाल्मीकि धर्म यात्रा पर निकले हैं । चाहते हैं कि समाज भी मुख्य धारा में शामिल हो । समाज में भरपूर शिक्षा हो । समाज नशों विषयों से दूर रहे अपने आप को पहचाने । मांस मदिरा का सेवन भूत पूजा बलि प्रथा जैसी गंदगी को घर से बाहर हमेशा के लिए फेंक दें । और उस नाम के साथ जुड़े जिस नाम से समाज जाना पहचाना जाता है । उसको गौर से देखने पर दिखेगा कि वो हाथों में क़लम लिए क़लम ईश्वर वाल्मीकि के रूप में साकार है । भविष्य लिखने वाला सृष्टि रचना कार है ।
जय वाल्मीकि जी