अंबेडकर जयंती पर उपद्रव के वीडियो सामने: कानून-व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा
अंबेडकर जयंती के अवसर पर आगरा और आजमगढ़ से सामने आए कुछ वीडियो और फोटो ने पूरे घटनाक्रम को एक नए दृष्टिकोण से सामने ला दिया है। इन दृश्य प्रमाणों में कथित रूप से कुछ स्थानों पर झंडा विवाद, नारेबाजी और टकराव की स्थिति देखी जा सकती है, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जिस संविधान और कानून की सर्वोच्चता की बात की थी, उसी के नाम पर यदि कहीं अशांति या टकराव की स्थिति बनती है, तो यह न केवल चिंताजनक है बल्कि उनके मूल विचारों के विपरीत भी है।
यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
👉 क्या इन घटनाओं को समय रहते रोका जा सकता था?
👉 क्या स्थानीय प्रशासन को पहले से संवेदनशीलता का अंदेशा नहीं था?
👉 और क्या अब केवल कार्रवाई पर्याप्त है, या भविष्य के लिए ठोस रणनीति की आवश्यकता है?
वीडियो और फोटो सामने आने के बाद यह आवश्यक हो गया है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे—चाहे वे किसी भी संगठन या विचारधारा से जुड़े हों।
साथ ही, यह भी आवश्यक है कि समाज में यह स्पष्ट संदेश जाए कि
किसी भी महापुरुष के नाम पर कानून तोड़ने या हिंसा फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन को चाहिए कि
• ऐसे संवेदनशील अवसरों पर पहले से निगरानी बढ़ाई जाए
• स्थानीय स्तर पर संवाद स्थापित किया जाए
• और किसी भी प्रकार के उपद्रव पर तुरंत और सख्त कार्रवाई हो
निष्कर्षतः, अंबेडकर जयंती जैसे अवसर समाज को जोड़ने के लिए होते हैं, न कि विभाजन और टकराव के लिए। अब समय है कि कानून का राज केवल दिखे ही नहीं, बल्कि महसूस भी हो।