logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

विषय:- सहारा इंडिया से जुड़े करोड़ों भारतीयों के जीवन, आजीविका और न्याय हेतु भावुक अपील एवं समाधान की गुहार

*विषय:- सहारा इंडिया से जुड़े करोड़ों भारतीयों के जीवन, आजीविका और न्याय हेतु भावुक अपील एवं समाधान की गुहार*
*आदरणीय महोदय/महोदया,*
मैं यह पत्र मात्र एक नागरिक के नाते नहीं, बल्कि उन करोड़ों जमाकर्ताओं (Investors) और लाखों कार्यकर्ताओं (Field Workers) की सिसकियों और पीड़ा के प्रतिनिधि के रूप में लिख रहा हूँ, जो आज अपने ही देश में 'तिल-तिल कर मरने' को मजबूर हैं।
सहारा इंडिया परिवार, जो 1 फरवरी 1978 से राष्ट्र सेवा में कार्यरत रहा, जिसने खेल, आपदा प्रबंधन और शहीदों के परिवारों को गोद लेने जैसे पुनीत कार्यों में गौरवशाली भूमिका निभाई, आज वह संस्था और उससे जुड़े लोग एक अंतहीन कानूनी प्रक्रिया की भेंट चढ़ गए हैं।
*हमारा पक्ष और हमारी वेदना निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से देश के सर्वोच्च नेतृत्व के समक्ष प्रस्तुत है:-*
1. *आजीविका का संकट*:- वर्ष 2022 से CRCS द्वारा कार्यप्रणाली पर लगी रोक के कारण लाखों कार्यकर्ताओं का रोजगार पूरी तरह ठप हो गया है। जो लोग ईमानदारी से मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे, वह आज भुखमरी और बेरोजगारी के कगार पर हैं। क्या "सबका साथ, सबका विकास" के युग में इन परिवारों की आजीविका छीनना न्यायसंगत है?
2. *न्याय में विलंब:-* संस्था ने अपनी पर्याप्त संपत्तियां माननीय न्यायालय के समक्ष समर्पित की हैं, जो सभी देनदारियों को पूरा करने के लिए सक्षम हैं। इसके बावजूद, 5 जनवरी 2026 के बाद भी सुनवाई में हो रही देरी हमें गहरे असमंजस में डाल रही है। न्याय में देरी, न्याय न मिलने के समान है।
3. *राजपत्र (Gazette) और सरकार की जिम्मेदारी:-* जब भारत सरकार ने राजपत्र के माध्यम से जिम्मेदारी ली है, तो फिर पोर्टल और दावों के निपटारे की गति इतनी धीमी क्यों है? रिपोर्ट बताती है कि 100 में से मात्र 2 लोगों तक ही सहायता पहुँच पा रही है। यह व्यवस्था समाधान कम और 'दिखावा' अधिक प्रतीत हो रही है।
4. *मानवीय त्रासदी:-* आज सहारा से जुड़ा आम कार्यकर्ता और जमाकर्ता अपने बच्चों की शिक्षा, विवाह, और बीमारी के इलाज के लिए पाई-पाई को मोहताज है। हमारे लिए होली, दिवाली और ईद जैसे त्योहार खुशियों के बजाय 'मातम' के दिन बन गए हैं। सालो से न्याय की प्रतीक्षा करते-करते कई लोग दुनिया छोड़ गए—इन मौतों का जिम्मेदार कौन है?
5. *एक विनम्र विनती:-* यदि इंसानियत और संवेदनशीलता के आधार पर विचार किया जाए, तो इस समस्या का समाधान 10 मिनट में संभव है। हम सर्वोच्च न्यायालय और सरकार से हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं कि हमें 'तारीख पर तारीख' के चक्रव्यूह से निकालकर एक ठोस समाधान दिया जाए।
हमें सामूहिक आत्मदाह के लिए मजबूर होने से बचाया जाए। हम इस देश के अनुशासित नागरिक हैं और सिर्फ अपने पसीने की कमाई और सम्मानजनक रोजगार की बहाली चाहते हैं।
*"पूछता है सहारा इंडिया परिवार—क्या हमारी जान की कोई कीमत नहीं? क्या हम इस देश में सुकून से जीने के हकदार नहीं हैं?"*
उम्मीद है कि भारत सरकार और माननीय सर्वोच्च न्यायालय इस गंभीर मानवीय संकट का संज्ञान लेकर जल्द ही कोई निर्णायक और सकारात्मक फैसला सुनाए......
#सहारा_इंडिया_को_सम्पूर्ण_जिम्मेदारी_दी_जाए
अब रोजगार चाहिए, इंतजार नहीं सुप्रीम कोर्ट से आखिरी गुहार 🙏 लाखों परिवारों की पुकार – सहारा शुरू करो!

20
484 views

Comment