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जालसाजों का महाघोटाला: फर्जी शिक्षकों के नाम पर डकारे करोड़ों, 48 अधिकारियों को SIT का समन

जलगांव: महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग में हुए एक बेहद चौंकाने वाले 'शालार्थ' घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। फर्जी कागजातों के सहारे 600 से अधिक शिक्षकों की फर्जी आईडी बनाकर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का वेतन डकारने का यह मामला अब राज्य की सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर है। नासिक की विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले में शिक्षा विभाग के 48 बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को तलब कर पूरी प्रशासनिक व्यवस्था में हड़कंप मचा दिया है।
​क्या है पूरा मामला?
​जांच में सामने आया है कि जलगांव जिले की कुछ स्कूलों ने बिना किसी उचित सत्यापन (Verification) के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों की भर्ती की। इस गिरोह ने इतने शातिर तरीके से काम किया कि 600 से ज्यादा फर्जी आईडी बनाकर सरकारी 'शालार्थ' प्रणाली के जरिए करोड़ों रुपये का वेतन निकाला गया। 2025 में नासिक आर्थिक अपराध शाखा ने जब 10 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और संस्था संचालकों से पूछताछ की, तो इस बड़े घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
​इन लोगों पर लटकी तलवार
​ SIT की सख्ती के बाद अब शिक्षा विभाग के कई बड़े चेहरे कटघरे में खड़े हैं। जिन 48 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा गया है, उनमें शामिल हैं:
​शिक्षा विभाग के आजी-माजी (वर्तमान और पूर्व) शिक्षणाधिकारी
​11 उप-शिक्षणाधिकारी
​3 कक्षाधिकारी
​वरिष्ठ और कनिष्ठ सहायक सहित अन्य कर्मचारी
​नाशिक SIT की कड़ी कार्रवाई
​जांच के दौरान तत्कालीन शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत और गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। SIT ने इन सभी अधिकारियों को 15 से 18 अप्रैल के बीच नासिक विभागीय कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
​यह घोटाला न केवल सरकारी धन की लूट का मामला है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की गरिमा पर भी एक बड़ा सवालिया निशान है। अब देखना यह होगा कि 4 दिनों तक चलने वाली इस मैराथन पूछताछ में और कौन से बड़े चेहरे बेनकाब होते हैं।

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