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आवास 2.0 योजना पर उठते सवाल, डेढ़ साल बाद भी लाभार्थी इंतजार में।

बिहार सहरसा/महिषी: सरकार की महत्वाकांक्षी आवास 2.0 योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। करीब डेढ़ साल पहले क्षेत्र में सर्वे कर लाभार्थियों की सूची जारी की गई थी, लेकिन आज तक पात्र लोगों को न तो आवास मिला और न ही कोई स्पष्ट जानकारी दी गई। ऐसे में गरीब परिवारों के मन में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीण पूछ रहे हैं—
क्या सर्वे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया?
जब सूची जारी हो चुकी है, तो आवास निर्माण की प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं हुई?
क्या विभागीय लापरवाही के कारण गरीबों का हक रोका जा रहा है?
आखिर कब तक लोग कच्चे और जर्जर घरों में रहने को मजबूर रहेंगे?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वे के दौरान अधिकारियों ने घर-घर जाकर जानकारी ली, दस्तावेज जमा कराए और जल्द आवास देने का भरोसा भी दिलाया। लेकिन आज तक न कोई किस्त आई और न ही निर्माण कार्य शुरू हुआ। इससे योजना की पारदर्शिता और कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बरसात और बाढ़ के मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को होती है, जिनका नाम सूची में होने के बावजूद उन्हें अब तक छत नसीब नहीं हुई। कई परिवार आज भी टूटे-फूटे घरों में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
समाजसेवी एवं स्थानीय प्रतिनिधि अबू बकर उर्फ पप्पू ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि
"सरकार गरीबों के लिए योजना बनाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है? यह गंभीर चिंता का विषय है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।"
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि आवास 2.0 योजना के तहत लंबित मामलों की तुरंत जांच कर जल्द से जल्द स्वीकृति और राशि जारी की जाए, ताकि गरीबों को उनका हक मिल सके और वे सुरक्षित जीवन जी सकें।

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