logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के चलते मार्च में थोक मूल्य मुद्रास्फीति में 3.88% की वृद्धि।आयात बिल बढ़ा,घरेलू लागत संरचना प्रभावित।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा 15 अप्रैल 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 3.88% हो गई है। यह फरवरी में दर्ज की गई 2.13% की तुलना में एक बड़ी छलांग है और पिछले 38 महीनों (जनवरी 2023 के बाद) का उच्चतम स्तर है।
मार्च में थोक महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव है।
क्रूड की मुद्रास्फीति में भारी तेजी देखी गई, जो फरवरी में -1.29% थी और मार्च में बढ़कर 51.57% पर पहुंच गई। ईंधन और बिजली की श्रेणी में मुद्रास्फीति एक साल बाद फिर से सकारात्मक (+1.05%) हो गई है, जबकि फरवरी में यह -3.78% थी।
वहीं पिछले महीने की तुलना में खनिज तेल की कीमतों में 8.77% का इजाफा हुआ है।
औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्र, जिसका WPI में सबसे अधिक भार (64.23%) है, वहां भी कीमतों में तेजी देखी गई है। 22 में से 16 औद्योगिक समूहों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
जहाँ ईंधन महंगा हुआ है, वहीं कुछ खाद्य पदार्थों में राहत मिली है सब्जियों जैसे प्याज (-42.11%) और आलू (-27.94%) की कीमतों में पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खाद्य महंगाई स्थिर रही। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि भारत के आयात बिल को बढ़ा रही है, जिससे घरेलू लागत संरचना प्रभावित हो रही है।

5
541 views

Comment