logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

हाथियों की सुरक्षा के लिए रेलवे का बड़ा कदम: फॉरेस्ट कॉरिडोर में ट्रेनों की रफ्तार नियंत्रित, 9 दिनों में 328 ट्रेनें प्रभावित

जमशेदपुर/चक्रधरपुर: वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम पहल करते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल ने हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फॉरेस्ट कॉरिडोर क्षेत्रों में ट्रेनों की गति को नियंत्रित किया है। इस विशेष अभियान के तहत 01 अप्रैल 2026 से 09 अप्रैल 2026 के बीच ट्रेनों के संचालन पर प्रभाव का आंकड़ा भी सामने आया है, जो इस प्रयास की गंभीरता और प्राथमिकता को दर्शाता है।
रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में टाटा–झारसुगुड़ा (Tata-JSG) तथा नुगाँव–राउरकेला (NXN-ROU) सेक्शन में कुल 328 ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ा। इन ट्रेनों को निर्धारित गति से कम रफ्तार पर चलाया गया, जिससे कुल 549.09 मिनट (लगभग 9 घंटे से अधिक) का समय नुकसान दर्ज किया गया। हालांकि, रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह समय नुकसान वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक और न्यायसंगत है।
दरअसल, झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती वन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। कई बार ये हाथी रेलवे ट्रैक पार करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका रहती है। बीते वर्षों में हाथियों के ट्रेन से टकराने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें रोकने के लिए रेलवे और वन विभाग लगातार समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं।
चक्रधरपुर मंडल द्वारा चिन्हित इन फॉरेस्ट कॉरिडोर में विशेष सतर्कता बरती जाती है। यहां लोको पायलटों को पहले से अलर्ट किया जाता है और ट्रेनों की गति सीमित रखी जाती है ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में समय रहते ट्रेन को रोका जा सके। इसके साथ ही ट्रैक के आसपास निगरानी भी बढ़ाई जाती है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, “हाथियों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। ट्रेन संचालन में थोड़ी देरी स्वीकार्य है, लेकिन किसी भी वन्यजीव की जान जाना नहीं। इसीलिए इन कॉरिडोर में सख्ती से स्पीड रेगुलेशन लागू किया गया है।”
इस पहल का सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है। जहां पहले दुर्घटनाओं की खबरें आती थीं, वहीं अब ऐसे मामलों में कमी आई है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने भी इस कदम की सराहना की है और इसे मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया है।
हालांकि, इस स्पीड नियंत्रण का असर आम यात्रियों पर भी पड़ता है, क्योंकि ट्रेनों के लेट होने से यात्रा समय बढ़ जाता है। लेकिन रेलवे का मानना है कि यात्रियों को भी इस संवेदनशील मुद्दे को समझना चाहिए और वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में तकनीक का उपयोग कर इस व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकता है, जैसे ड्रोन निगरानी, सेंसर आधारित अलर्ट सिस्टम आदि। इससे ट्रेनों को अनावश्यक रूप से धीमा किए बिना भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
कुल मिलाकर, दक्षिण पूर्व रेलवे का यह कदम पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित रेल संचालन के बीच संतुलन बनाने की एक सराहनीय पहल है, जो आने वाले समय में अन्य रेलवे जोनों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

14
1075 views

Comment