समता के मूल स्रोत को भी मिले सम्मान
आज बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करना सराहनीय है, लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि उन्होंने जिस मार्ग—समता, बंधुत्व और विचारधारा—को अपनाया, उसकी जड़ें महात्मा गौतम बुद्ध जी की शिक्षाओं में ही निहित है।
फूल अगर सिर्फ व्यक्तित्व पर चढ़ें और विचारों को नजरअंदाज किया जाए, तो यह श्रद्धा कम और औपचारिकता ज्यादा लगती है।।
काश, एक माला श्री बुद्ध की प्रतिमा पर भी पड़ जाती—तो संदेश और भी संवैधानिक, संतुलित और सार्थक होता!!