अलकनंदा तट पर स्वच्छता अभियान के साथ मनाया गया बैसाखी पर्व और डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती
पौड़ी गढ़वाल। सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था “भागीरथी कला संगम” द्वारा 14 अप्रैल को बैसाखी पर्व एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर अलकनंदा तट पर भव्य स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 6 बजे हुई, जिसमें संस्था के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और नदी तट की सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया।
स्वच्छता अभियान के उपरांत नदी किनारे स्थित अम्बेडकर पार्क में डॉ. अम्बेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने बारी-बारी से माल्यार्पण कर संविधान निर्माता को नमन किया। कार्यक्रम के अगले चरण में संस्था अध्यक्ष राजेंद्र बर्थवाल ने मिष्ठान वितरण कर सभी को बैसाखी पर्व और अम्बेडकर जयंती की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के वरिष्ठ संरक्षक रमेश चंद्र ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया और डॉ. अम्बेडकर की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर द्वारा दलितों, अल्पसंख्यकों एवं महिलाओं के अधिकारों के लिए किए गए कार्य आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जिनके कारण महिलाएं आज समाज में निरंतर प्रगति कर रही हैं।
वहीं संरक्षक दीनबंधु चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान सभा के प्रमुख सदस्यों में से एक डॉ. अम्बेडकर नव भारत के निर्माता थे। उनकी दूरदर्शिता और विचारधारा ने देश को एक मजबूत संविधान प्रदान किया। उन्होंने यह भी बताया कि डॉ. अम्बेडकर अपने समय के एशिया के सबसे अधिक शिक्षित व्यक्तियों में से एक थे और उन्होंने अनेक उच्च डिग्रियां प्राप्त कर देश का गौरव बढ़ाया।
कार्यक्रम में संस्था के वरिष्ठ सदस्य राजेंद्र रावत, अवदेश मणि, भगत सिंह बिस्ट और हरि प्रसाद उनियाल सहित अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. अम्बेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था निर्देशक मदन गड़ोई द्वारा किया गया।
इस अवसर पर संस्था के कोषाध्यक्ष हरेंद्र तोमर, उप सचिव रवि पुरी, सांस्कृतिक सचिव संजय कोठारी, हरिप्रसाद उनियाल, अवदेश कुमार मणि, राजेंद्र रावत, भगत सिंह बिस्ट, शशि बिस्ट, ममता, सोनिका रजत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने न केवल स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि समाज को डॉ. अम्बेडकर के आदर्शों पर चलने का संदेश भी दिया।