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संविदा कर्मियों की होगी समीक्षा, निगम को बनाया जाएगा कैशलेस : महापौर अरुणा शंकर

मेदिनीनगर नगर निगम में कार्यप्रणाली को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए मेदिनीनगर की महापौर अरुणा शंकर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि निगम में कार्यरत सभी संविदा कर्मियों की जल्द समीक्षा की जाएगी और जिनके कार्यों से निगम की छवि खराब हो रही है या जो नियम विरुद्ध गतिविधियों में शामिल हैं, उनकी संविदा समाप्त कर दी जाएगी।

महापौर ने हाल ही में एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का खंडन करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल से जुड़े आरोप पूरी तरह निराधार हैं। खबर में दावा किया गया था कि एक संविदा कर्मी ने अपनी पत्नी के नाम पर निगम में रजिस्ट्रेशन कर कॉन्ट्रैक्ट कार्य किया और उसका भुगतान उनके कार्यकाल में हुआ। इस पर महापौर ने कहा कि उन्होंने तत्काल निगम से रिपोर्ट मांगी, जिसमें सहायक नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि संबंधित कार्य और भुगतान उनके कार्यकाल समाप्ति के बाद और पुनः महापौर बनने से पहले ही हो चुका था।


महापौर ने कहा कि अब नगर विकास विभाग से नए पदाधिकारी मिलने के बाद संविदा कर्मियों की वास्तविक आवश्यकता का भी आकलन किया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि जो कर्मचारी निगम में रहते हुए ठेकेदारी कर रहे हैं या अनुशासनहीनता में लिप्त हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।


सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए महापौर ने निगम का एक मोबाइल एप तैयार कराने की भी घोषणा की। इस एप के जरिए नागरिक गंदगी, स्ट्रीट लाइट, पानी, सड़क पर मलबा, आवारा कुत्तों समेत जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़ी शिकायतें सीधे दर्ज कर सकेंगे। शिकायतों के समाधान के लिए समय सीमा तय होगी और कार्य पूर्ण होने पर संबंधित नागरिक से स्टार रेटिंग भी ली जाएगी। इस पूरे सिस्टम की मॉनिटरिंग वार्ड पार्षदों से लेकर उच्च अधिकारियों और स्वयं महापौर द्वारा की जाएगी।

उन्होंने जानकारी दी कि 17 अप्रैल को सफाई, स्ट्रीट लाइट और पेयजल व्यवस्था को लेकर सभी पार्षदों और उपमहापौर की उपस्थिति में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कई समस्याओं के समाधान की दिशा तय की जाएगी।

महापौर अरुणा शंकर ने कहा कि उन्हें तीन माह का समय दिया जाए, निगम का राजस्व भी बढ़ेगा और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं भी मिलेंगी। उन्होंने निगम को पूरी तरह कैशलेस बनाने की दिशा में भी पहल की बात कही। उनके अनुसार, अब निगम में सभी प्रकार के भुगतान ऑनलाइन या स्कैनर के माध्यम से लिए जाएंगे, ताकि नगद लेनदेन पूरी तरह समाप्त हो और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

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