❤️कविता: “डॉ. भीमराव अम्बेडकर”❤️
😛ज्ञान की ज्योति जलाकर जिसने, अंधियारा हर लिया,
अन्याय के हर बंधन को, साहस से तोड़ दिया।
वो थे भारत के वीर सपूत, संघर्षों के अवतार,
डॉ. भीमराव अम्बेडकर, सबके दिलों के आधार।😂
😃छुआछूत की जंजीरों में, जकड़ा था सारा समाज,
उठ खड़े हुए वो बनकर, बदलाव की एक आवाज़।
कलम को बनाया शस्त्र उन्होंने, सत्य को ढाल बनाया,
हर पीड़ित के हक़ के लिए, जीवन भर संग्राम रचाया।😃
💝गरीबी, तिरस्कार सहकर भी, हिम्मत कभी न हारी,
शिक्षा को अपना हथियार बनाकर, दुनिया से लड़ी ये लड़ाई भारी।
संविधान के निर्माता बनकर, देश को नई राह दिखाई,
समानता, स्वतंत्रता, बंधुता की, ज्योति सदा जगमगाई।😜
👏दलितों के वो मसीहा थे, मानवता के सच्चे पुजारी,
हर दिल में बसते हैं आज भी, बनकर एक प्रेरणा भारी।
उनकी सीख हमें बताती है— शिक्षा ही असली शक्ति है,
अन्याय के विरुद्ध खड़े रहना ही, सच्ची मानव भक्ति है।👏
😞आओ मिलकर नमन करें हम, उस महान इंसान को,
जिसने दिया नया जीवन, इस प्यारे हिंदुस्तान को।
डॉ. अम्बेडकर का सपना, हम सब मिलकर साकार करें,
समानता और न्याय के पथ पर, आगे बढ़कर संसार करें।😞