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बैसाखी का पर्व फुल्यारी के पूजन का दिन ....

गढ़वाल कुमाऊं क्षेत्र में चैत्र माह में पूरे महीने फुल्यारी कन्याएं हर सुबह सूर्योदय से पहले घरों की दहलीज़ में फूल डालती हैं। गढ़वाल कुमाऊं की ये परंपरा आज भी देश विदेश में रहने वाले गढ़वाली कुमाऊनी मनाते हैं। बैशाखी के दिन जिसे गढ़वाली में बिखौत कहते हैं, आज के दिन फुल्यारी सूर्योदय के बाद घरों की दहलीज़ में अंतिम दिन फूल डालती हैं और पूजी जाती है। हर घर में बिखौत का त्यौहार मनाया जाता है, पूड़ी- पकौड़ी बनाई जाती है और फुल्यारी कन्याओं को दक्षिणा और उपहार भेंट किए जाते हैं।
देश में बैसाखी, पोंगल , ओणम नाम से त्यौहार मनाने की परम्परा सदियों से चली आ रही है। हमारा दायित्व है ये परम्परा पीढ़ी दर पीढ़ी ऐसी ही चलती रहे। तीज़ त्यौहार हमारे वैज्ञानिक दृष्टि कोण के साक्षी हैं। विज्ञान और आस्था का समागम हमारे तीज़ त्यौहार।

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