‘नारी शक्ति वंदन’ को बताया सामाजिक न्याय और नए भारत की निर्णायक दिशा
राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा कि भारत 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने प्रस्तावित महिला आरक्षण को ‘नारी शक्ति को समर्पित ऐतिहासिक कदम’ बताते हुए कहा कि यह निर्णय केवल संसद की प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक चरित्र को नई ऊंचाई देने वाला बदलाव है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के विकास की इस निर्णायक यात्रा में लिया जाने वाला यह फैसला आने वाले भारत की दिशा तय करेगा। उनके अनुसार यह कदम दशकों से चले आ रहे उस इंतजार को समाप्त करेगा, जिसमें महिलाओं की प्रभावी राजनीतिक भागीदारी को लेकर लगातार मांग उठती रही है।
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नववर्ष और शहीदों को नमन से शुरुआत
अपने संबोधन की शुरुआत प्रधानमंत्री ने देशभर में मनाए जा रहे नववर्ष उत्सवों के उल्लेख से की। उन्होंने असम में बोहाग बिहू के उत्साह का जिक्र किया और कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में नववर्ष का उल्लास दिखाई दे रहा है। इस अवसर पर उन्होंने जलियांवाला बाग के शहीदों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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‘नारी शक्ति को समर्पित होगा यह फैसला’
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कह रहे हैं कि भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक लेने जा रहा है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर नारी शक्ति को समर्पित निर्णय बताया।
उनके शब्दों में, यह फैसला केवल महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय को शासन और निर्णय प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
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संसद रचेगी नया इतिहास
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की संसद एक नया इतिहास रचने के मार्ग पर है। यह ऐसा इतिहास होगा जो अतीत के अधूरे संकल्पों को साकार करेगा और भविष्य के भारत के लक्ष्यों को नई गति देगा।
उन्होंने कहा कि एक ऐसे भारत की कल्पना की जा रही है, जहां सामाजिक न्याय केवल राजनीतिक नारा न रहकर कार्य संस्कृति और नीति निर्माण की स्वाभाविक प्रक्रिया बन जाए।
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महिला आरक्षण के इंतजार का अंत
प्रधानमंत्री मोदी ने 16, 17 और 18 अप्रैल की तारीखों को विशेष बताते हुए कहा कि इन्हें दशकों से चले आ रहे महिला आरक्षण के इंतजार के अंत के रूप में देखा जाएगा।
उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में नई संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में पहला ऐतिहासिक कदम उठाया गया था। अब इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना समय की मांग है।
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विशेष संसदीय बैठक का संकेत
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस कानून को समयबद्ध तरीके से लागू करने और लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने के लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक आयोजित की जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बैठक आने वाले वर्षों की चुनावी और संसदीय संरचना पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।
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‘सलाह नहीं, आशीर्वाद लेने आया हूं’
सम्मेलन में मौजूद महिलाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह यहां कोई सलाह देने नहीं, बल्कि देश की महिलाओं का आशीर्वाद लेने आए हैं।
उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचीं महिलाओं के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति इस ऐतिहासिक क्षण को और अधिक अर्थपूर्ण बनाती है।
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चार दशकों की चर्चा, सर्वदलीय सहमति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महिलाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था में आरक्षण देने की आवश्यकता दशकों से महसूस की जा रही थी। करीब चार दशकों से इस विषय पर चर्चा चल रही थी, जिसमें कई राजनीतिक दलों और पीढ़ियों के नेताओं की भूमिका रही।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब 2023 में यह कानून संसद में लाया गया था, तब सभी दलों ने सर्वसम्मति से इसका समर्थन किया था। विपक्ष ने भी जोर देकर कहा था कि इसे 2029 तक हर हाल में लागू किया जाना चाहिए।
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लोकतंत्र में संवेदनशीलता बढ़ाएगा यह कदम
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से शासन में संवेदनशीलता आती है। कई अध्ययनों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व नीति निर्माण को अधिक मानवीय और समाज-केंद्रित बनाता है।
उनके अनुसार संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति से शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों को नई प्राथमिकता मिलेगी।
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नए युग के आगमन का संदेश
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं को ‘नए युग के आगमन’ की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारत के लोकतंत्र को और मजबूत करेगा और वैश्विक स्तर पर देश की छवि को नई पहचान देगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति और सामाजिक जीवन में लाखों महिलाओं की सक्रिय भागीदारी दुनिया के बड़े नेताओं और विशेषज्ञों के लिए भी आश्चर्य का विषय है, और यह भारत के लिए असीम गौरव लेकर आएगा।
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मैगज़ीन विश्लेषण
महिला आरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान केवल राजनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की नई बहस का केंद्र बन चुका है। यदि यह पहल तय समयसीमा में लागू होती है, तो भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ सकती है।
इससे न केवल संसद और विधानसभाओं की संरचना बदलेगी, बल्कि नीति निर्माण की प्राथमिकताओं में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।