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फिर विवादों में पटना–टाटा वंदे भारत एक्सप्रेस: यात्री को परोसा गया कच्चा चावल, रेल मंत्री से शिकायत

जमशेदपुर : देश की प्रीमियम ट्रेनों में गिनी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर खानपान की खराब व्यवस्था को लेकर विवादों में आ गई है। इस बार मामला पटना से टाटानगर आने वाली ट्रेन संख्या 21894 से जुड़ा है, जहां एक यात्री को कच्चा और ठंडा भोजन परोसने का आरोप लगा है। घटना के बाद यात्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) के माध्यम से सीधे अश्विनी वैष्णव और रेल मंत्रालय से शिकायत दर्ज कराई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार को पटना से टाटानगर की यात्रा कर रहे यात्री वरुण कुमार ने ट्रेन में शाकाहारी भोजन का ऑर्डर दिया था। आरोप है कि कुछ समय बाद जब भोजन परोसा गया तो बताया गया कि नियमित खाना खत्म हो चुका है। इसके बाद कोच अटेंडेंट ने उन्हें विकल्प के तौर पर एक पैकेज्ड “रेडी टू ईट” भोजन उपलब्ध कराया।
बताया जा रहा है कि यात्री को जो भोजन दिया गया वह हल्दीराम का रेडी-टू-ईट पैकेट था, जिसकी कीमत लगभग 150 रुपये बताई गई। इस तरह के भोजन को पैकेट पर दिए निर्देशों के अनुसार पहले गर्म कर परोसना आवश्यक होता है, लेकिन यात्री का आरोप है कि उन्हें यह खाना बिना गर्म किए ही दे दिया गया।
वरुण कुमार ने अपनी शिकायत में कहा कि परोसा गया खाना पूरी तरह ठंडा था और चावल इतने कच्चे थे कि उन्हें खाना मुश्किल हो गया। उन्होंने इसे यात्रियों की सेहत के साथ गंभीर लापरवाही करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रीमियम ट्रेन में इस तरह की सेवा बिल्कुल अस्वीकार्य है, जहां यात्री बेहतर सुविधाओं की उम्मीद के साथ यात्रा करते हैं।
यात्री द्वारा सोशल मीडिया पर की गई शिकायत के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया है। रेलवे की छवि पर भी सवाल उठने लगे हैं, खासकर तब जब वंदे भारत जैसी ट्रेनों को आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली सेवाओं का प्रतीक माना जाता है।
गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले 15 मार्च को भी इसी पटना–टाटा वंदे भारत एक्सप्रेस में खानपान को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई थी। उस घटना में एक यात्री को अमूल की दही दी गई थी, लेकिन पैकेट खोलने पर उसमें कीड़े पाए गए थे। यह मामला सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन हरकत में आया था।
उस समय रेल मंत्रालय ने संबंधित कैटरिंग एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे हटा दिया था। साथ ही एजेंसी पर 40 लाख रुपये और अमूल पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद नई एजेंसी “आरके एसोसिएट एंड होटलियर्स प्राइवेट लिमिटेड” को वंदे भारत एक्सप्रेस में कैटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इसके बावजूद फिर से ऐसी घटना सामने आने से सवाल उठ रहे हैं कि क्या नई व्यवस्था भी यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन देने में विफल हो रही है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे को सिर्फ कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लगातार निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करना चाहिए।
इस ताजा मामले के बाद उम्मीद की जा रही है कि रेलवे प्रशासन एक बार फिर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा। फिलहाल यह घटना वंदे भारत एक्सप्रेस की सेवाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है।

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