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झांसी की मिट्टी का कर्ज गोल्ड मेडल जीतकर चुकाना चाहता हूँ :केतन कुशवाहा

झाँसी+ 16वीं सब-जूनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश को स्वर्ण पदक दिलाने वाले कप्तान और झांसी नगर के उभरते हॉकी सितारे केतन कुशवाहा ने खेल विश्लेषक बृजेंद्र यादव से खास बातचीत के मुख्य अंश:
प्रश्न: नेशनल चैंपियन बनने और कप्तानी का अनुभव कैसा रहा?
केतन: यह एक सपने जैसा है। यूपी की कप्तानी करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। टीम के हर खिलाड़ी ने मैदान पर जान लगा दी। फाइनल में मध्य प्रदेश जैसी मजबूत टीम को 5-2 से हराना हमारी कड़ी मेहनत का नतीजा है।
प्रश्न: मैच के चौथे मिनट में ही आपने गोल किया, उस वक्त दिमाग में क्या चल रहा था?
केतन: कप्तान होने के नाते मुझ पर शुरुआती बढ़त दिलाने की जिम्मेदारी थी। कोच रजनीश मिश्रा सर ने हमेशा सिखाया है कि शुरुआती दबाव विपक्षी टीम को बैकफुट पर धकेल देता है। वह गोल पूरी टीम के आत्मविश्वास के लिए जरूरी था।
प्रश्न: आप हॉकी इंडिया लीग (HIL) के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने हैं, 'श्राची बंगाल टाइगर्स' के साथ जुड़कर कैसा लग रहा है?
केतन: ₹2.5 लाख में नीलामी और सबसे युवा खिलाड़ी होने का टैग मेरे लिए बड़ी जिम्मेदारी है। बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना मेरे लिए सीखने का सबसे बड़ा अवसर होगा।
प्रश्न: अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे?
केतन: सबसे पहले अपने माता-पिता को व स्व.कैलाश सर जिन्होंने झांसी में सीमित संसाधनों के बावजूद मुझ पर भरोसा किया। फिर यूपी स्पोर्ट्स हॉस्टल (लखनऊ) के अपने कोचों और साथियों को, जिन्होंने मुझे एक प्रोफेशनल खिलाड़ी के रूप में तराशा।
प्रश्न: झांसी के युवाओं और आने वाले खिलाड़ियों के लिए आपका क्या संदेश है?
केतन: झांसी वीरों की धरती है और हॉकी यहाँ के खून में है। बस मेहनत करते रहिए, क्योंकि खेल के मैदान पर छोटा शहर या बड़ा शहर मायने नहीं रखता, केवल आपकी 'परफॉर्मेंस' बोलती है।
प्रश्न: आपका अगला लक्ष्य क्या है?
केतन: अभी मेरा पूरा ध्यान हॉकी इंडिया लीग (HIL) के आगामी मैचों पर है। मेरा अंतिम लक्ष्य नीली जर्सी पहनकर ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतना है।

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