भाव के बिना भगवान कीमती चीजें भी नहीं स्वीकारते — कथावाचक दिनेश गर्ग जी
ग्राम धनेटा में श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिवस पर रुक्मणी विवाह प्रसंग ने बांध
//सिंग्रामपुर//
ग्राम धनेटा में श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिवस पर रुक्मणी विवाह प्रसंग ने बांधा समा
सिंग्रामपुर /// ग्राम धनेटा में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा वाचक पंडित दिनेश गर्ग गुरु महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान केवल सच्ची भावना के भूखे होते हैं, बिना भाव के वे कीमती से कीमती वस्तु भी स्वीकार नहीं करते। उन्होंने समझाया कि यदि कोई भक्त सच्चे मन से एक फूल भी अर्पित कर दे, तो प्रभु प्रसन्न हो जाते हैं। जब मनुष्य के हृदय में ईश्वर प्रेम जागृत होता है, तब वह संसार के मोह-माया से ऊपर उठकर भक्ति मार्ग में स्थिर हो जाता है। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और मनोहारी वर्णन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कथा पंडाल में आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं, जिनमें महारास लीला, गोपी-उद्धव संवाद एवं श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह उत्सव प्रमुख रहे। महाराज श्री ने भगवान भोलेनाथ का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण की महारास लीला इतनी दिव्य है कि स्वयं भोलेनाथ भी उनके बाल स्वरूप के दर्शन हेतु गोकुल पहुंचे थे। मथुरा गमन प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि जब अक्रूर जी भगवान श्रीकृष्ण को मथुरा ले जाने आए, तब ब्रज की गोपियां रथ के आगे खड़ी होकर करुणा भरे स्वर में बोलीं— “हे कन्हैया, जब तुम्हें हमें छोड़कर जाना ही था, तो हमसे प्रेम क्यों किया पूरे कथा स्थल पर भक्ति भाव से ओतप्रोत वातावरण बना रहा। रुक्मणी विवाह के अवसर पर प्रस्तुत मंगल झांकी ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मधुर भजनों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने इस पावन प्रसंग का उल्लासपूर्वक आनंद लिया। इस धार्मिक आयोजन का आयोजन ग्राम धनेटा में यजमान कृपाल पटेल एवं उनके परिवार द्वारा श्रद्धापूर्वक किया जा रहा है।