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मानगो मेयर चुनाव विवाद: कोर्ट में टकराव, आरोपों की आंधी और पलटवार की राजनीति

जमशेदपुर के मानगो नगर निगम मेयर चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी संघर्ष में बदलता नजर आ रहा है। पूर्व मेयर प्रत्याशी संध्या सिंह द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाने के बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया है। उन्होंने 27 फरवरी 2026 को घोषित चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।

याचिका में क्या हैं मुख्य आरोप?

संध्या सिंह ने अपनी याचिका में चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पूरे चुनाव में पारदर्शिता का अभाव रहा और कई स्तरों पर नियमों की अनदेखी की गई।
उन्होंने खासतौर पर निर्वाचित मेयर सुधा गुप्ता की पात्रता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके निवास से जुड़े दस्तावेज संदिग्ध हैं। आरोप है कि मतदाता सूची में उनका नाम गलत तरीके से जोड़ा गया, जबकि उनके निवास में कोई वास्तविक परिवर्तन नहीं हुआ था।

नामांकन प्रक्रिया पर उठी उंगली

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि नामांकन के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने दस्तावेजों की गहन जांच नहीं की। संध्या सिंह के अनुसार, यदि सही तरीके से जांच होती, तो कई तथ्यों का खुलासा हो सकता था।
उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया की बड़ी चूक बताते हुए पूरे चुनाव की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगाया है।

आयोग से निराशा, अब न्यायालय से उम्मीद

यह मामला पहले राज्य निर्वाचन आयोग, झारखंड के समक्ष भी रखा गया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद इसे न्यायालय में ले जाया गया।
अदालत ने मामले को स्वीकार करते हुए 15 मई 2026 को सुनवाई की तारीख तय की है, जिससे अब यह विवाद कानूनी रूप से निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।

मेयर पक्ष का कड़ा जवाब

दूसरी ओर, मेयर सुधा गुप्ता के पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनके प्रेस सलाहकार संजय ठाकुर ने बयान जारी कर कहा कि यह सभी आरोप निराधार और भ्रामक हैं।
उन्होंने दावा किया कि चुनाव पूरी तरह नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत संपन्न हुआ है और सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही नामांकन स्वीकार किया गया था।

‘भ्रम फैलाने की कोशिश’

मेयर पक्ष का कहना है कि मतदाता सूची और निवास से जुड़े मुद्दे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, जिन्हें जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
उनके अनुसार, जनता को गुमराह करने और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से इस विवाद को हवा दी जा रही है।

मानहानि केस की चेतावनी

विवाद को और तीखा बनाते हुए मेयर पक्ष ने यह भी कहा है कि यदि बिना सबूत के आरोप लगाए जाते रहे, तो संबंधित लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
यह बयान इस बात का संकेत है कि मामला अब केवल चुनावी विवाद नहीं, बल्कि कानूनी लड़ाई का भी रूप ले सकता है।

विकास बनाम राजनीति का आरोप

मेयर समर्थकों ने दावा किया कि मानगो में चल रहे विकास कार्यों से कुछ लोग असहज हैं और इसी कारण राजनीतिक साजिश के तहत आरोप लगाए जा रहे हैं।
उनका कहना है कि सुधा गुप्ता क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं—जैसे पानी, सड़क और नाली—के सुधार में लगातार सक्रिय हैं।

पलटवार में उठे कई सवाल

मेयर पक्ष ने संध्या सिंह पर भी सवाल उठाते हुए उनके निवास, पारिवारिक पृष्ठभूमि और चुनावी आचरण को लेकर कई आरोप लगाए हैं।
साथ ही उनके पति के व्यवसाय और चुनाव के दौरान कथित तौर पर पैसे व उपहार बांटने के मुद्दे को भी उठाया गया है, जिससे यह विवाद और ज्यादा व्यक्तिगत और राजनीतिक हो गया है।

लोकतंत्र की कसौटी पर मामला

पूरा घटनाक्रम अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच फंसा हुआ दिख रहा है।
जहां एक पक्ष चुनाव को अवैध बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे साजिश करार दे रहा है।

अब 15 मई पर टिकी नजरें

इस पूरे विवाद का अगला और सबसे अहम पड़ाव 15 मई 2026 की सुनवाई होगी। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या चुनाव परिणाम पर कोई असर पड़ेगा।
फिलहाल, मानगो की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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