स्मार्ट मीटर बना सिरदर्द: उपभोक्ता ने लगाया मनमानी बिलिंग और बिजली कटौती का आरोप
स्मार्ट मीटर लगाने के बाद एक उपभोक्ता ने बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उपभोक्ता का कहना है कि मीटर लगने के बाद से बिलिंग में भारी गड़बड़ी हो रही है और बिना उचित कारण बिजली आपूर्ति भी काट दी गई।
पीड़ित उपभोक्ता के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को उनके स्मार्ट मीटर का बिल -363 रुपये आया, जिसे उन्होंने उसी दिन 400 रुपये जमा कर भर दिया। इस भुगतान के बाद उनके खाते में 37 रुपये एडवांस के रूप में बच गए।
लेकिन अगले ही दिन, यानी 2 अप्रैल को उन्हें एक मैसेज प्राप्त हुआ जिसमें बिल -128 रुपये दिखाया गया। उपभोक्ता का आरोप है कि इस दौरान लगभग 165 रुपये अचानक काट लिए गए, जिसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
इस गड़बड़ी को लेकर उपभोक्ता ने तुरंत बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के जवाब में विभाग ने एक सप्ताह के भीतर समस्या समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन 9 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी रही।
इसी बीच, उपभोक्ता को एक और झटका तब लगा जब उन्हें दोपहर में मैसेज मिला कि उनकी बिजली लाइन काट दी गई है, जबकि उस समय बिल केवल -282 रुपये ही था।
इतना ही नहीं, 11 अप्रैल को आए नए मैसेज में बिल बढ़कर -393 रुपये हो गया। उपभोक्ता का कहना है कि बिना बिजली इस्तेमाल किए, रातभर में ही 111 रुपये का अतिरिक्त बिल जोड़ दिया गया, जो पूरी तरह से समझ से परे है।
उपभोक्ता की नाराजगी
पीड़ित ने आरोप लगाया कि:
स्मार्ट मीटर में बिना वजह यूनिट जुड़ रहे हैं
शिकायत करने पर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा
हेल्पलाइन पर बात अधूरी छोड़कर कॉल काट दी जाती है
बिना उचित कारण बिजली कनेक्शन काट दिया गया
1 किलोवाट लोड पर कितना आना चाहिए बिल?
विशेषज्ञों के अनुसार:
यदि 1 किलोवाट (kW) लोड है और रोज़ 6–8 घंटे उपयोग होता है, तो औसतन 150–250 यूनिट प्रति माह खपत हो सकती है
सामान्य दरों पर इसका बिल लगभग 800 से 1500 रुपये प्रति माह के बीच होना चाहिए (राज्य की दरों के अनुसार थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है)
लेकिन यहां जिस तरह से बिना उपयोग के बिल बढ़ने और अचानक कटौती की बात सामने आई है, वह गंभीर सवाल खड़े करती है।
क्या कहते हैं नियम?
बिना उचित नोटिस के बिजली काटना गलत है
स्मार्ट मीटर में रियल टाइम रीडिंग और पारदर्शिता होना जरूरी है
शिकायत का समयबद्ध समाधान देना विभाग की जिम्मेदारी है
मांग
उपभोक्ता ने मांग की है कि:
बिलिंग की पूरी जांच हो
गलत तरीके से काटी गई राशि को समायोजित किया जाए
स्मार्ट मीटर की तकनीकी जांच कराई जाए
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
निष्कर्ष
स्मार्ट मीटर जहां एक ओर पारदर्शिता और सुविधा के लिए लगाए जा रहे हैं, वहीं इस तरह की घटनाएं व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह मामला बड़े स्तर पर उपभोक्ताओं के बीच असंतोष का कारण बन सकता है।