"बाबा साहेब की 135वीं जयंती: पटना में ऐतिहासिक समारोह,
राज्यपाल करेंगे उद्घाटन,
विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
पटना। भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर राजधानी पटना में एक भव्य एवं ऐतिहासिक समारोह का आयोजन किया जा रहा है।
14 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को प्रातः 10 बजे से अम्बेडकर भवन, दारोगा प्रसाद राय पथ, पटना में होने वाले इस समारोह में बिहार के माननीय राज्यपाल ले० जनरल सय्यद अता हसनैन मुख्य अतिथि एवं उद्घाटनकर्ता की भूमिका निभाएंगे।
डॉ. अम्बेडकर सेवा एवं शोध संस्थान, पटना के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ए.के. अम्बेडकर (IPS, Ex. DG) करेंगे। उपाध्यक्ष के रूप में प्रो० (डॉ०) रमाशंकर आर्य (पूर्व कुलपति) उपस्थित रहेंगे।
गरिमामयी उपस्थिति — एक विशिष्ट जमावड़ा:
इस अवसर पर श्रीमती रचना पाटिल (IAS), सचिव, वित्त विभाग;
प्रो० श्रीमती दीप्ति कुमारी, सदस्य, बिहार लोक सेवा आयोग;
प्रो० अनिल चमड़िया, वरिष्ठ पत्रकार;
श्रीमती अलका वर्मा, अधिवक्ता, पटना उच्च न्यायालय;
तथा श्री धनंजय कुमार, पूर्व अध्यक्ष छात्र संघ JNU, ई. विश्वनाथ चौधरी,ई. ओमप्रकाश मांझी, विनोद चौधरी सहित अनेक शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा एवं छात्र-छात्राएं भाग लेंगी।
समारोह में IPS अधिकारी, न्यायिक जगत, शैक्षणिक समुदाय और पत्रकारिता — चारों क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति इस आयोजन को असाधारण महत्व प्रदान करती है।
राज्यपाल हसनैन की उपस्थिति — संदेश क्या है?
यह उल्लेखनीय है कि ले० जनरल सय्यद अता हसनैन मात्र एक माह पूर्व — 14 मार्च 2026 को — बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण कर राजभवन पहुंचे हैं।
अपने पद ग्रहण के महज एक माह के भीतर बाबा साहेब की जयंती जैसे संवैधानिक-सामाजिक न्याय के प्रतीक आयोजन में उनकी उपस्थिति एक स्पष्ट संकेत है — कि संविधान और समता का सम्मान राजभवन की प्राथमिकता में है।
जयंती मनाना काफी नहीं
बाबा साहेब ने कहा था — "Educate! Agitate!! Organise!!!" — यही तीन शब्द हैं। लेकिन प्रश्न यह है कि इन तीन शब्दों की आत्मा आज कहाँ है?
शिक्षित करो — तो फिर बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को दशकों तक वेतन क्यों नहीं मिलता? दलित और वंचित समाज के बच्चे आज भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित क्यों हैं?
आंदोलित करो — तो जातीय भेदभाव, ऊपर से नीचे तक व्याप्त प्रशासनिक उदासीनता और संवैधानिक अधिकारों के हनन के विरुद्ध आवाज़ कौन उठाएगा?
संगठित करो — तो क्या केवल जयंती समारोहों तक ही संगठन सीमित रहेगा, या अधिकारों की लड़ाई साल के 365 दिन चलेगी?
मांग और अपील:
यह समारोह केवल माल्यार्पण और भाषणों का मंच न बने। राज्यपाल महोदय की उपस्थिति में इस मंच से —
SC/ST वर्ग के लंबित सेवा प्रकरणों पर ठोस निर्देश
शिक्षा विभाग में दशकों से लटके वेतन विवादों का समाधान,
अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारियों के संगठित प्रतिनिधित्व को बल,
जैसे मुद्दों पर संकल्प लिया जाना चाहिए।