*महात्मा ज्योतिबा फुले के विचार हमें समतामूलक समाज निर्माण की देता है प्रेरणा:- विभागाध्यक्ष, डॉ. अनिल कु. चौधरी*
*महात्मा ज्योतिबा फुले के विचार हमें समतामूलक समाज निर्माण की देता है प्रेरणा:- विभागाध्यक्ष, डॉ. अनिल कु. चौधरी*
*● ज्योतिबा फुले के योगदान भारतीय इतिहास में रहेगा सदैव प्रेरणास्रोत, बोले प्रो. मुनेश्वर यादव*
*● ज्योतिबा फुले के विचार को अपनाकर भारत 2047 तक बन सकता है विकसित राष्ट्र, बोले डॉ. मनोज कुमार*
*● महिला शिक्षा के क्षेत्र में भी ज्योतिबा फुले ने पेश की मिसाल, बोली डॉ. नीतू कुमारी*
*विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग में महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती का हुआ आयोजन*
*दरभंगा:-* आज दिनांक 11 अप्रैल 2026 को विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग में महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती का आयोजन विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि महान समाज सुधारक, शिक्षाविद और विचारक ज्योतिराव फुले जी ने अपने पूरे जीवन को सामाजिक समानता, शिक्षा के प्रसार और जातिगत भेदभाव के खिलाफ संघर्ष के लिए सदैव समर्पित रहे। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों, विशेषकर महिलाओं और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े समुदायों के उत्थान के लिए ऐतिहासिक कार्य किए। उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज में परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने महिला शिक्षा की शुरुआत कर समाज में नई चेतना जगाई और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई। आज उनके विचार हमें एक समान, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं। उनके आदर्शों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
पूर्व विभागाध्यक्ष सह विभाग के वरीय शिक्षक डॉ. मुनेश्वर यादव ने कहा कि समाज में समानता, शिक्षा और न्याय की अलख जगाने वाले महान क्रांतिकारी विचारक ज्योतिराव फुले जी को हम अपनी ओर से श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं। उनका योगदान भारतीय इतिहास में सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने उस दौर में सामाजिक बदलाव की नींव रखी, जब जाति और भेदभाव की जड़ें बहुत गहरी थीं।
मिथिला विश्ववविद्यालय के उप-परीक्षा नियंत्रक (तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा) सह विभागीय वरीय सहायक प्राध्यापक डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि आज के समय में, जब सामाजिक समरसता और समान अवसर की बात हो रही है, तब ज्योतिराव फुले जी के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही हम एक सशक्त और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण कर सकते हैं। ज्योतिबा फुले के विचार को अपनाकर भारत 2047 तक बन सकता है विकसित राष्ट्र। हम अपनी ओर से उस महामानव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने अपना सर्वस्व जीवन सामाजिक समरसता और समान अवसर के लिये न्योछावर कर दिया।
विभागीय वरीय सहायक प्राध्यापिका डॉ. नीतू कुमारी ने कहा कि सामाजिक समरसता और न्यायपूर्ण समतामूलक समाज के साथ-साथ उन्होंने महिला शिक्षा पर भी बहुत जोर दिया और मिसाल पेश की। उनका मानना था कि आधी आबादियों को शिक्षित किये और उन्हें रोजगार के अवसर से जोड़कर ही देश को समृद्धि के रास्ते पर ले जाया जा सकता है, जिसकी उन्होंने न केवल नींव रखी। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा परिवर्तन साहस, संघर्ष और समाज के प्रति समर्पण से ही संभव है। हम उन्हें अपनी ओर से श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं।
मंच संचालन शोधार्थी रिक्की गणेश कुमार व धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी कंचन कुमारी ने किया। इस मौके पर दर्जनों शोधार्थी व छात्र-छात्रा उपस्थित थे, जिन्होंने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये।