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राष्ट्रीय काव्य संग्रह मंच द्वारा आयोजित हुई एक शाम कवयित्री सीमा गुप्ता के नाम


मेरठ - राष्ट्रीय काव्य संग्रह मंच द्वारा
दिनांक 12 4 2026 दिन रविवार को एक शाम सीमा गुप्ता के नाम की गई।
कार्यक्रम के अध्यक्षता किरन सिंह मुख्य अतिथि ओमकार गुलशन विशिष्ट अतिथि आर के भटनागर अनुपमा भटनागर,सुभाष गोस्वामी दीवान गिरी गोस्वामी, डॉ सुदेश यादव दिव्य रहे। मां सरस्वती के चित्र के आगे दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया वंदना नीलम मिश्रा द्वारा की गई संचालन अरुणा पवार एवं सुदेश यादव दिव्य द्वारा किया गया।
किरण सिंह ने कहा
हम बताएंगे प्यार मोहब्बत उल्फत का गुलिस्ता जिसमें फूल फलेगा फूलेगा प्यार मोहब्बत का रिश्ता।
अरुणा पवार ने कहा
हिंदू हो तो गीता का ज्ञान बन जाओ मुस्लिम हो तो मजहवे फरमान बन जाओ।
आशा त्यागी ने कहा
खामोशी में भी उसके बड़ा ही शऊर था।
‌सवाति सिंह ने कहा
अल्फ़ाज़ में उसके जो जो कुदरत का नूर था ।
बातों का दौर है यह क्यों का दौर है। जिंदा की अर्थियों पर बेतासों का दौर है।
कार्यक्रम का आकर्षण सीमा गुप्ता रहीं।उन्होंने अपनी कविताओं द्वारा खूब तालियां बटोरी। सीमा गुप्ता ने पढ़ा
जिंदगी यूं ही चलती जाएगी
एक दिन आखिरी मंजिल मिल भी जाएगी
उम्र का क्या किया हमने
बस यही बात दिल में आएगी

ओमकार गुलशन ने कहा
लगती है कभी फूल कभी कर जिंदगी है
जीत कभी और कभी हार ज़िंदगी
दिखला रही है रोज नए रंग यह
इस पार है कभी उस पार है जिंदगी
कार्यक्रम का आकर्षण सीमा गुप्ता रहीं।उन्होंने अपनी कविताओं द्वारा खूब तालियां बटोरी। सीमा गुप्ता ने पढ़ा
जिंदगी यूं ही चलती जाएगी
एक दिन आखिरी मंजिल मिल भी जाएगी
उम्र का क्या किया हमने
बस यही बात दिल में आएगी

नीलम मिश्रा ने पढ़ा
बहारों में गुलों का नक्श खिलना भी जरूरी है।
खिजाओ में झरे पत्ते बिखरना भी जरूरी है।
बुलंदी पर कदम रखना अच्छा है मगर लेकिन
जमी हो पांव के नीचे परखना भी जरूरी है। रखना अच्छा है मगर लेकिन
जमी हो पांव के नीचे परखना भी जरूरी है।
डॉ सुदेश यादव दिव्य ने कुछ यूं कहा
मौहब्बत रोकने से और भी ज्यादा निकलती है।
कदम दुश्वार हैं हर पांव पर बाधा निकलती है,
भरोसा आपके वायदों पर हो तो जाएगा लेकिन,
हजारों गोपियों में एक ही राधा निकलती है।
अरुणा पवार,रेखा गिरीश, प्रदीप अग्रवाल,आशा त्यागी, स्वाति सिंह,राम कुमारी, रचना बनिया, सारिका मेहता,कमलेश तन्हा, अलका गुप्ता, रिचा सिंह, अशोक रावत, उत्तम चौधरी, राजीव कुमार,अनिल गुप्ता,आदिल अहमद, विनय नौक , राम कुमारी,बीना मंगल, नंदिनी रस्तोगी , नीलम सिंघल, आशीष, कविता, आंचल,ओम, आरुषि, दिव्यांश गुप्ता, कृष्ण गुप्ता,रामवतार त्यागी ,सुरेंद्र खेड़ा , मनमोहन भल्ला, आदि सभी ने काव्य पाठ किया।
अंत में नीलम मिश्रा ने सभी का आभार व्यक्त किया

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