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पौड़ी गढ़वाल में गूंज रही गढ़वाली सिनेमा की धमक, ‘बैमी शंख’ फिल्म की शूटिंग जोरों पर


पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकजीवन को बड़े पर्दे पर उतारने का प्रयास करते हुए भागीरथी कला संगम के बैनर तले बन रही नई गढ़वाली फिल्म ‘बैमी शंख’ की शूटिंग इन दिनों पौड़ी जनपद के विभिन्न रमणीय स्थलों पर जोर-शोर से चल रही है। फिल्म की शूटिंग बिलकेदार, गरिगांव, कुकड़ू गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में की गई है, जहां स्थानीय प्राकृतिक सौंदर्य को कैमरे में खूबसूरती से कैद किया जा रहा है।
पिछले कई दिनों से लगातार जारी इस शूटिंग शेड्यूल के दौरान बिछली ढांडरी क्षेत्र में भी फिल्म के कई महत्वपूर्ण दृश्यों को फिल्माया गया। स्थानीय लोगों में फिल्म को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है और वे शूटिंग का हिस्सा बनकर अपनी संस्कृति को परदे पर देखने को लेकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
फिल्म के निर्देशक मदन गड़ोई ने बताया कि ‘बैमी शंख’ एक प्रेरणादायक कहानी पर आधारित है, जो एक ऐसे व्यक्ति के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो ईश्वर में अटूट आस्था रखता है। हालांकि, वह व्यक्ति अपने जीवन में हर मोड़ पर असफलताओं का सामना करता है, लेकिन अंततः उसकी सच्ची श्रद्धा रंग लाती है और वह सफलता हासिल करता है।
उन्होंने आगे कहा कि फिल्म के माध्यम से समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देने का प्रयास किया गया है—जहां सच्ची आस्था इंसान को सफलता की ओर ले जाती है, वहीं अंधविश्वास (अर्धांस्था) व्यक्ति को पतन की ओर धकेल सकता है। यह फिल्म दर्शकों को न केवल मनोरंजन देगी, बल्कि उन्हें सोचने पर भी मजबूर करेगी।
फिल्म में प्रमुख भूमिकाओं में धर्मेंद्र, शशि बिष्ट, रमेश चंद्र थपलियाल, राजेंद्र बर्थवाल, हरी प्रसाद उनियाल, अरुण कुमार, यमुना प्रसाद काला सहित कई अनुभवी कलाकार नजर आएंगे। सभी कलाकार अपने अभिनय से गढ़वाली सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
तकनीकी पक्ष की बात करें तो फिल्म का कैमरा वर्क शुभम रावत द्वारा संभाला जा रहा है, जबकि गीत-संगीत की जिम्मेदारी किशोरी सेमवाल ने निभाई है। फिल्म के संगीत में गढ़वाली लोकधुनों की झलक देखने को मिलेगी, जो दर्शकों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगी।
स्थानीय स्तर पर बन रही इस तरह की फिल्मों से न केवल क्षेत्रीय कला और संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और प्रतिभा दिखाने का भी अवसर उत्पन्न हो रहा है। ‘बैमी शंख’ फिल्म से भी ऐसी ही उम्मीदें की जा रही हैं कि यह गढ़वाली सिनेमा में एक नई मिसाल कायम करेगी।

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