मशहूर सिंगर आशा भोसले जी का 93 साल की उम्र में हुआ निधन
फिल्म इंडस्ट्री की वर्सेटाइल सिंगर आशा भोसले जी का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है।
मशहूर सिंगर आशा भोसले जी का निधन हो गया है और उन्होंने 92 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। भारत रत्न और 'गणसम्राज्ञी' लता मंगेशकर जी की छोटी बहन आशा भोसले हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की एक वर्सेटाइल प्लेबैक सिंगर के तौर पर जानी जाती थीं। उन्होंने छह दशकों तक इंडस्ट्री में अपने गानों को आवाज़ दी है। उन्होंने न केवल हिंदी बल्कि मराठी, बंगाली, गुजराती, तमिल, तेलुगु समेत कई भाषाओं में गाने गाए हैं। उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज संगीतकारों आर. डी. बर्मन, ओ. पी. नैयर, सचिन देव बर्मन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जी के साथ कई अमर गाने गाए हैं। आशा भोसले जी ने इंडस्ट्री को 'दम मारो दम' और 'ओम शांति ओम' जैसे कई सुपरहिट गाने दिए हैं।
आशा भोसले जी के बेटे आनंद भोसले जी मीडिया के सामने आए और आंखों में आंसू लिए आशा ताई के निधन की जानकारी दी। साथ ही, आशा ताई को कल (सोमवार) सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक देखा जा सकता है। उसके बाद आशा भोसले जी की शवयात्रा निकलेगी और शाम 4 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शिवाजी पार्क दादर के श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
आशा भोसले जी को उनकी तबीयत खराब होने की वजह से तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आशा भोसले की पोती जनाई भोसले ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके अपनी दादी की हालत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, "मेरी दादी को सीने में इन्फेक्शन है और वह बहुत कमजोर हैं... इसलिए उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है... कृपया हमारी प्राइवेसी का सम्मान करें, उनका इलाज चल रहा है... वह जल्द ही ठीक हो जाएंगी..."
ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल के बाहर सिक्योरिटी बढ़ाई गई
आशा भोसले जी को नेचुरल कारणों से ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उन्होंने वहीं आखिरी सांस ली। इस महान सिंगर के निधन से पूरे देश में शोक फैल गया है। इसी तरह, ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल के बाहर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है।
आशा जी का करियर
आशा भोसले, इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की सबसे वर्सेटाइल और महान प्लेबैक सिंगर्स में से एक हैं। उन्होंने अपने करियर में हजारों गाने गाए हैं और हिंदी, मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, तमिल, तेलुगु समेत कई भाषाओं में अपनी आवाज दी है। उन्होंने 1950 के दशक में अपना करियर शुरू किया और धीरे-धीरे अपने यूनिक स्टाइल से अपने लिए एक खास जगह बनाई। ओ. पी. नैयर, आर. डी. बर्मन के साथ उनकी जोड़ी खास तौर पर पॉपुलर थी।
क्लासिकल से लेकर कैबरे, पॉप, गजल और रोमांटिक गानों तक, उन्होंने हर जॉनर में अपनी पहचान बनाई। उनके गाने 'पिया तू अब तो आजा', 'दम मारो दम', 'इन आँखों की मस्ती' जैसे गाने आज भी उतने ही पॉपुलर हैं जितने पहले थे। उन्होंने अपने करियर में कई नेशनल अवॉर्ड और पद्म विभूषण जैसे सम्मान जीते हैं। उनकी आवाज़ के जादू और संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान की वजह से, उन्हें भारतीय संगीत जगत में एक अमर शख्सियत के तौर पर जाना जाता है। ॐ शांति ॐ नमः