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नजीबाबाद के तीन अधिवक्ताओं के लाइसेंस निलंबितः बार काउंसिल उत्तर प्रदेश ने 5 साल के लिए की कार्रवाई

उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने नजीबाबाद के तीन अधिवक्ताओं के लाइसेंस पांच साल के लिए निलंबित कर दिए हैं। ये अधिवक्ता नजीबाबाद बार काउंसिल के पूर्व पदाधिकारी थे। उन पर 2024-25 के नजीबाबाद बार काउंसिल चुनाव के दौरान कई अधिवक्ताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का आरोप है।


पीड़ित अधिवक्ताओं ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई थी। तत्कालीन अध्यक्ष शिव किशोर गौड़ ने आदेश दिया था कि इन अधिवक्ताओं को चुनाव में मतदान करने दिया जाए। हालांकि, उस समय के नजीबाबाद बार काउंसिल के चेयरमैन और अध्यक्ष ने इस आदेश का पालन नहीं किया।

इसके बाद, नजीबाबाद के पीड़ित अधिवक्ताओं ने दोबारा शिकायत की। बार काउंसिल के अध्यक्ष ने एक जांच समिति गठित की, जिसकी अध्यक्षता पूर्व चेयरमैन इमरान मजीद खान एडवोकेट ने की। समिति ने भी इन अधिवक्ताओं को मतदान करने देने और स्पष्टीकरण के लिए उपस्थित होने का आदेश दिया। आरोप है कि नजीबाबाद बार काउंसिल के तीनों पदाधिकारियों ने इन आदेशों की अवहेलना की और अपने पद का दुरुपयोग किया।

इन घटनाओं के बाद, अधिवक्ता पंकज बिश्नोई ने संबंधित धाराओं में एक मुकदमा दायर किया। इस मामले की डेढ़ साल तक जांच चली, जिसमें पंकज बिश्नोई और तीनों आरोपी अधिवक्ताओं को सुना गया तथा साक्ष्य एकत्र किए गए।

एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर, 10 अप्रैल को डाक द्वारा इन अधिवक्ताओं को लाइसेंस निरस्तीकरण (निलंबन) की सूचना प्राप्त हुई।

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