logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

“शिक्षा के मंदिर में ‘दलाली’: TC के नाम पर वसूली और सिस्टम की सड़ी हकीकत"



विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

बिहार के सीतामढ़ी से आई खबर ,जहां एक हेडमास्टर को छात्रों से ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) के नाम पर अवैध वसूली के आरोप में निलंबित किया गया —
कोई सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के अंदर पल रहे भ्रष्टाचार के कैंसर का खुला संकेत है।
सवाल सिर्फ एक HM का नहीं — पूरी व्यवस्था पर है
यह घटना केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं है।
यह उस व्यवस्था की विफलता है, जहां:शिक्षा को अधिकार नहीं, कमाई का साधन बना दिया गया,
गरीब और ग्रामीण छात्रों को शोषण का आसान लक्ष्य समझा गया,
और सबसे शर्मनाक — बच्चों के भविष्य पर “रेट-लिस्ट” लगाई गई
TC: एक कागज या ‘उगाही का लाइसेंस’?
सरकारी नियम साफ कहते हैं:
“TC जारी करना पूरी तरह मुफ्त सेवा है।”
फिर भी, जमीनी हकीकत यह है कि:
₹100 से ₹500 तक की वसूली आम बात है
अभिभावक डर और मजबूरी में चुप रहते हैं
शिकायत करने पर छात्रों को प्रताड़ित करने का डर बना रहता है
यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं — शिक्षा के अधिकार (Right to Education) का खुला उल्लंघन है।
निलंबन: कार्रवाई या ‘Damage Control’?
शिक्षा विभाग ने HM को निलंबित कर दिया — यह सराहनीय कदम है।
लेकिन असली सवाल यह है:
क्या यह एक isolated case है?
या पूरे राज्य में ऐसी वसूली का नेटवर्क फैला हुआ है?

सच्चाई यह है कि:
“जब तक पूरे सिस्टम की जांच नहीं होगी, हर निलंबन सिर्फ एक ‘बलि का बकरा’ साबित होगा।”

सबसे बड़ा नुकसान:
भरोसे का पतन,
इस तरह की घटनाएं सिर्फ पैसे की लूट नहीं करतीं,
बल्कि:शिक्षा व्यवस्था पर जनता का भरोसा तोड़ती हैं,
गरीब छात्रों के मन में हीनता और अन्याय की भावना भरती हैं,
और समाज को यह संदेश देती हैं कि
“बिना पैसे के कुछ नहीं होता”

समाधान: सिर्फ कार्रवाई नहीं, सिस्टम सुधार जरूरी,
अगर सरकार सच में गंभीर है, तो:
राज्यव्यापी ऑडिट: सभी स्कूलों में TC और अन्य सेवाओं की जांच
हेल्पलाइन / ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: छात्रों के लिए सुरक्षित शिकायत व्यवस्था
डिजिटल TC सिस्टम: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी हो,

जवाबदेही तय हो: केवल HM नहीं, संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई
जनजागरूकता अभियान: अभिभावकों को उनके अधिकार बताना
निष्कर्ष:
सीतामढ़ी की यह घटना एक चेतावनी है —
अगर अब भी सिस्टम नहीं बदला, तो आने वाले समय में शिक्षा पूरी तरह “व्यापार” बन जाएगी।
“जब स्कूल में ही ईमानदारी मर जाए,
तो समाज में न्याय की उम्मीद बेमानी हो जाती है।”

0
0 views

Comment